आंवला के फायदे और नुकसान – यहाँ Amla के विभिन्न Benefits और Side Effects को जानें!



आंवला एक फल होता है| इसका आकार गोल होता है,और स्वाद में हल्का कड़वा होता है| इसमें पाया जाने वाला विटामिन के कारण आंवला स्वास्थ के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है आंवला आयुर्वेद में सर्वोत्तम औषधीय में से एक है, यह बालों और त्वचा के लिये बहुत लाभकारी होता है| आंवला को रसायन द्रव्यों में भी बहुत अच्छा माना जाता है,चरक सहिंता के अनुसार आंवला आयु बढाने, पाचन ठीक करने, खांसी और कुष्ठ को ठीक करने में अच्छी औषधीय है,आंवला का प्रयोग आज से नहीं बल्कि वौदिक काल से चला आ रहा है| इस लेख को अंत तक पढ़ें और आंवला के फायदे और नुकसान के बारे में जानें साथ ही आप आंवला के फायदे और नुकसान (Benefits and Side Effects of Amla in Hindi) पर आधारित इस लेख को भविष्य में उपयोग करने के लिए सेव भी कर सकते हैं।

यहाँ एलोवेरा के फायदे और नुकसान पढ़ें।

आंवले का परिचय | Introduction of Amla in Hindi

आंवला के फायदे और नुकसान जानने से पहले हम आंवला का परिचय देखते हैं। आंवला एशिया, अफ्रीका और यूरोप में पाया जाता है, यह घरों में बगीचों और जंगलों में देखा जाता है, यह एक क्षारीय पौधा होता है, जिसकी लम्बाई लगभग 8-10 मीटर (20-25 फिट) तक होती है| यह त्वचा और बालों के लिये बहुत ही फायदेमंद होता है| आंवले में पाए जाने वाले विटामिन्स, मिनरल और पोषक तत्त्वों के कारण इसका उपयोग करना और भी जरूरी हो जाता है, आंवले का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है | जिसे आप आगे इस लेख में जानेंगे प्रायः इसका रंग हल्का हरा होता है इसके सेवन से आयु में वृद्धि, यौवन, स्वास्थ्य, मेधा और स्मरणशक्ति बढती है, च्यवनप्राश और ब्राम्हा रसायन आंवले से ही तैयार किये जाते हैं |

गिलोय के फायदे, नुकसान और औषधीय गुण

आंवला के अन्य नाम | Different Name of Amla in Hindi 

आंवला के फायदे और नुकसान जानने से पहले हम आंवला के विभिन्न नामों को जानें। आंवला का वानस्पतिक नाम (Scientific Name of Amla) पांईलैंथस एम्बलिका (Phyllanthus Emblica) है, न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है | जो नीचे इस प्रकार हैं –

Amla in –

संस्कृत में अमृता, अमृत,फल, आमलकी, पंचरसा
हिन्दी में आमला, आँवला, आवरा, आवला, औरा
अंग्रेजी में एम्ब्लिक माइरीबालन(Emblicmyrobalan), इण्डियन गूजबेरी
गुजरती में आमली(Amli), आमला
मराठी में आँवले(Anwale), आवलकाठी(Aawalkathi)
पंजाबी में आमला
बंगाली में आमलकी (Amlaki), आमला
असम में आमलुकी (Amluki), अमला
तमिल में नेल्लिमार (Nellimaram)
तेलुगु में उसरिकाय (Usirikai)
नेपाली में अमला (Amla)
अरबी में आमलज्ज
मलयालम में नेल्लिमारम(Nellimaram), नेल्लिका(Nellikka)
कन्नड़ में नेल्लिकाय (Nellikai), नेल्लि (नेल्लि)
उर्दू में आंवला (Anwala)
उडिया में औंला (Onola)



आंवला के फायदे और नुकसान – आंवला के फायदे (Benefits of Amla in Hindi) –

दोस्तों आंवले का सेवन करने से कई फायदे हैं, यह आपके स्वास्थ्य के लिये कई प्रकार से मदद करता है, आंवला पित्त, वात और कफ तीनों को संतुलित करता है|

1. पाचन तन्त्र में आंवला खाने के फायदे –

आंवले का सेवन करना पाचन तन्त्र के लिये बहुत अच्छा होता है, आंवले का जूस पीने से कब्ज और गैस से राहत मिलती है| क्योंकि आंवले में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन में सुधार करके पाचन क्रिया को स्वस्थ बनाता है | आंवला लेग्जेटिक का काम करता है, आंवले के सेवन से शरीर में मल के द्वारा हानिकारक विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं |

2. कब्ज में आंवला खाने के फायदे –

आज के समय में जिस तरह का खान–पान है, इसकी वजह से बहुत से लोग कब्ज की समस्या से परेशान हैं, इसके लिये आंवले का सेवन फायदेमंद हो सकता है |

3. एसिडिटी में आंवला के लाभ –

एसिडिटी होना आज के समय में आम बात तो गई है | एसिडिटी में आंवले का बीज बहुत लाभकारी हो सकता है, आंवले के लगभग 10 ग्राम बीज को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इसे पीस कर 250 ग्राम गाय के दूध में इसका सेवन करें ऐसा करने से एसिडिटी में फायदा होता है |

4. वजन कम करने में आंवला खाने के फायदे –

मोटापे की समस्या से परेशान लोगों के लिये आंवला फायदेमंद होता है, आंवला शरीर में मौजूद गन्दगी और टोक्सिंस को साफ करके वजन कम करने में सहायक होता है यदि आप रोजाना इसका सेवन करते हैं, तो शरीर में गन्दगी नहीं जम पाती है,जो आपके वजन को कम करने में बहुत मदद करता है |

5. डायबिटीज में आंवला खाने के फायदे –

डायबिटीज के मरीजों के लिये आंवला के फायदे (Amla ke Fayde in HIndi) बहुत कारगर साबित होते हैं, आंवला में क्रोमियम तत्त्व पाए जाते हैं, जो कि इन्सुलिन हार्मोन को मजबूत बनाता है, और ब्लड शुगर को कन्ट्रोल करता है, डायबिटीज के मरीज आंवले के रस में शहद मिलाकर इसका सेवन करें इससे बहुत आराम मिलता है |

6. कैंसर में आंवला खाने के फायदे –

चूँकि आंवले में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, इसके साथ ही एंटी-कैंसर गुण भी पाए जाते हैं, एक रिसर्च के अनुसार आंवला कैंसर सेल की ग्रोथ को रोकता है इसलिए इसका उपयोग कैंसर से बचाव के लिये भी किया जाता है, आंवला का सेवन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने वाला होता है, इसके सेवन से यह कैंसर के जीवियों को काफी हद तक कम करने में मदद करता है | हालाँकि आंवला कैंसर के लिये कितना प्रभावशाली है, इसमें अभी और शोध किये जाने की आवश्यकता है |

7. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आंवला –

आंवला खाने के फायदे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मदद करते हैं | रोजाना आंवला का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता बढती है, और साथ ही शरीर में ऊर्जा का संचार भी होता है |

8. बालों के लिये आंवला खाने के फायदे –

आंवला के फायदे बालों के लिये भी बहुत उपयोगी हैं | बालों से ही किसी इंसान की शोभा बढती है बालों का घने, लम्बे और सुन्दर बनाने के लिये लोग तरह-तरह के शैम्पू, तेल इसके अलावा कई सारे प्रोडक्ट्स उपयोग (Use) करते हैं | लेकिन यदि आप प्रतिदिन आंवला का उपयोग करते हैं ,तो इससे न सिर्फ बालों की ग्रोथ अच्छी होती है बल्कि बाल मजबूत बनते हैं | यदि आप लगातार आंवले का सेवन करते हैं तो बालों की रुसी, गंजापन और बाल सफ़ेद होने की समस्या दूर होती है |

  • बालों को झड़ने से रोकने में –

जैसा की हम सब जानते हैं, की आंवला में विटामिन सी पाया जाता है ,जो बालों के लिये बहुत ही जरूरी होता है | आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण बालों का झड़ना कम होता है और बाल मजबूत बनते हैं |

  • रुसी को कम करने में –

आंवला में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं ,जो बालों में डैंड्रफ (रुसी) एक्जिमा जैसी परेसानियों से छुटकारा दिलाते हैं |

  • बालों को सफ़ेद होने से रोंके –

बालों के सफ़ेद होने में आंवला खाने के फायदे (Amla ke fayde in hindi) बहुत ही लाभकारी सिद्ध होते हैं, बालों में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है जो पिग्मेटेंसन को समर्द्ध बनाता है यदि किसी के बाल उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं | तो वो लगातार आंवला का सेवन करते रहें कुछ ही दिन के बाद आप देखेंगे की आपके सफ़ेद बाल काले हो गए हैं | आप चाहें तो अपने सिर पर आंवला पाउडर या पेस्ट को लगा सकते हैं,इससे आपके सिर की त्वचा को भरपूर मात्रा पोषण मिलता है |

  • बालों की वृद्धि में आंवला –

आंवले में पाए जाने वाले फैटी एसिड के कारण बालों की ग्रोथ (विकास) बहुत तेजी से होती है, आंवले में पाए जाने वाले पोषक तत्त्वों के कारण बाल लम्बे, घने, मुलायम बनते हैं,इसके साथ ही बालों की जड़ें मजबूत बनती हैं | बालों को स्वस्थ बनाये रखने के लिये सिर पर आंवले के तेल की मालिश करनी चाहिये |

9. गले के लिये आंवला खाने के फायदे –

खान-पान की वजह से गले में थायराइड (Thyroid) जैसी समस्या हो जाती है तब यदि आप आंवले का सेवन करते हैं तो यह गले को स्वस्थ बनाता है, यदि आप आंवले के जूस के साथ उसमे थोडा सा अदरक मिलाकर सेवन करते हैं, तो यह थाइरोइड और गले की समस्या से निजात दिलाता है |अगर आप आंवले के रस में अदरक के रस और एक चम्मच शहद मिलाकर इसे पीते हैं तो इससे खांसी से छुटकारा मिलता है |

10.हड्डियों के लिये आंवला खाने के फायदे –

आपने इस लेख में ऊपर आंवला के पौष्टिक तत्त्व में पढ़ा ही है, कि आंवले में कैल्शियम पाया जाता है | यह हड्डियों को मजबूत बनाता है,आंवला वात में भी लाभकारी होता है, और जोड़ों के दर्द से निजात दिलाता है | यदि आप नियमित रूप से आंवले का सेवन करते हैं,तो इससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं |

11 .मल त्याग में आंवला खाने के फायदे –

आंवले में विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट (Anti-Oxident) गुण पाए जाते हैं,आंवला गुर्दे और मूत्राशय के लिये बहुत जरूरी होता है, यदि आप अपने दिन की शुरुआत आंवले से करते हैं | तो मूत्र प्रणाली स्वस्थ बनती है और साथ ही मल त्याग करने में आसानी हो जाती है,अर्थात् मल त्याग के दौरान ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ती है | इससे गुर्दे स्वस्थ रहते हैं और यहपथरी में भी लाभकारी होता है | इसलिए आंवला गुर्दे और मूत्राशय को स्वस्थ रखने के साथ यह गर्भाशय के संक्रमण से बचाव करने में फायदेमंद होता है |

12. ह्रदय स्वास्थ्य में आंवला खाने के फायदे –

ह्रदय सम्बन्धी समस्या को कम करने के लिये और ह्रदय को स्वस्थ बनाये रखने के लिये आंवला के फायदे बहुत ही लाभकारी होते हैं,आंवला में औषधीय गुण पाए जाते हैं जिसके सेवन से ह्रदय स्वस्थ रहता है और ह्रदय सम्बन्धी परेशानी भी दूर होती हैं |

13. आँखों की रोशनी में आंवला खाने के फायदे –

दोस्तों, जर्नल ऑफ़ फार्माकोग्नासी एंड फाइटोकेमिस्ट्री के एक शोध के अनुसार आंवला का सेवन करने से कंजेकिटवाइटिस एवं ग्लूकोमा आँखों के विकारो को दूर करने में मदद करता है  दरअसल कंजेकिटवाइटिस में आंख के सफ़ेद हिस्से में सूजन की समस्या हो जाती है,जबकि ग्लुलोमा में आंख की रोशनी अथवा नजर कमजोर होने की समस्या होने लगती है, तब यदि आप आंवले के जूस का सेवन करते हैं या फिर आंवले के जूस में शहद मिलाकर इसका सेवन करते हैं तो आँखों से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं |

14. सूजन कम करने में आंवला खाने के फायदे –

आपने लेख के शुरू में पढ़ा ही है की आंवले में बहुत से पोषक तत्त्व और एंटी-इन्फ्लामेट्री जैसे गुण पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में सहायक होते हैं | जिससे मांसपेशियों और हड्डियों में भी सूजन को कम करने में मदद मिलती है इसलिए आंवला जूस के फायदे सूजन को काफी हद तक कम करने में लाभकारी होते हैं |

15. पीलिया में आंवले खाने के फायदे –

यदि कोई भी इंसान पीलिया की समस्या से जूझ रहा है तो उसके लिये आंवले का सेवन करना बहुत फायदेमंद हो सकता है वो आंवले को बहुत तरह से सेवन कर सकते हैं | जैसे- आंवला चूर्ण, जूस, चटनी, मुरब्बा आदि |

16. दिमाग (स्मरणशक्ति) में आंवला खाने के फायदे –

दिमाग के लिये भी आंवले के फायदे बहुत जरूरी हैं, आंवले का सेवन करने से मस्तिष्क में खून का संचार ठीक से होने लगता है,जिससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है और साथ ही स्मरणशक्ति भी बढती है,आंवला में मौजूद विटामिन और खनिज जो की मस्तिष्क के लिये बहुत जरूरी होते हैं, इसके अलावा आंवला में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट मस्तिष्क को स्वस्थ बनाये रखते हैं आंवला के सेवन करने से मेधा और स्मरणशक्ति मजबूत होती है जिससे व्यक्ति की एकाग्रता बढती है |

17. दांतों के लिये आंवला खाने के फायदे –

दांतों की समस्या की लिये आंवला एक लाभकारी औषधीय है | कई लोगों के दांतों में कीड़े लग जाते हैं ऐसे में उनके दांत दर्द करने लगते हैं दरअसल दांतों में कीड़े लगने का मुख्य कारण स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन होता है,लेकिन आंवले के सेवन से यह स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन नामक बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है,आंवला में एक एंटी-माईक्रोबाल एजेंट पाया जाता है,जो कि बैक्टीरिया को मारकर उससे होने वाली समस्या को ख़त्म करता है |

18. नकसीर में आंवले खाने के फायदे –

यदि आपको नकसीर की समस्या है, तो नकसीर में आंवला के फायदे के लिये, आंवले के बीज को शुद्ध घी में तल लें अब इसे अच्छे से पीस लें और इसका पेस्ट बना कर रोज माथे पर लगाएं, ऐसा करने से नकसीर की समस्या दूर हो जाती है |

19. स्किन में आंवला खाने के फायदे –

आंवला का सेवन करना त्वचा के लिये बहुत फायदेमंद होता है आंवला एंटी-एजिंग फल होता है इसके सेवन से चेहरे से झुर्रियां ठीक होती हैं,आंवले का हर रोज सेवन करने से यह उम्र से पहले बुढा दिखने की समस्या को दूर करके लम्बी उम्र प्रदान करता है  एवं चेहरे में चमक लाता है,इसलिए सभी को आंवले का सेवन करना करना चाहिये |

20. बॉडी को डिटाक्स करे आंवला –

आंवला बॉडी को डिटोक्स करने का बहुत अच्छा रसायन होता है आंवले का सेवन करने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है आंवला में एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है आंवला का लगातार सेवन करने से शरीर में से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं |

21. एनीमिया में आंवला खाने के फायदे –

एनीमिया अथवा खून की कमी होने का मुख्य कारण है, आयरन की कमी  शरीर में आयरन की कमी हो जाने से एनीमिया अथवा खून की कमी की शिकायत हो जाती है | जैसा की आप सब जानते हैं, की आंवले में आयरन पाया जाता है, जिसका सेवन करने से एनीमिया जैसी समस्या दूर हो जाती है |

22. बवासीर में आंवले खाने के फायदे –

बवासीर के मरीजों के लिये आंवला के फायदे फायदेमंद हो सकते हैं,बवासीर की समस्या ज्यादा मसालेदार खाना अथवा ज्यादा मिर्च का सेवन करने से हो सकती है | बवासीर में आंवले का जूस पीना बहुत फायदेमंद और लाभकारी होता है |यदि बवासीर में अधिक खून आ रहा है तो 5-10 ग्राम आंवले के चूर्ण में दही से ऊपर की परत (दही की मलाई) के साथ सेवन करें |


आंवले का उपयोग कैसे करें | How to Use Amla in Hindi

आंवला को आप एक नहीं बल्कि कई तरीकों से इसका सेवन कर सकते हैं जैसे – आंवले का जूस, चूर्ण के रूप में, आंवले का फल, आचार, चटनी, मुरब्बा इत्त्यादि तरीकों से यदि आप आंवले का सेवन करते हैं | तो आप भी आंवले के गुणों का फायदा ले सकते हैं |

  • आंवले का जूस –

आंवले का जूस जोकि आंवले के कच्चे फलों से निकाला जाता है,इसमें विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो सेहत के लिये बहुत उपयोगी होता है |

  • आंवले का चूर्ण –

आंवले का चूर्ण, इसे सुखा कर पीस के बनाया जाता है ,इसे अपने पास रखने और लम्बे समय तक बनाये रखने के लिये आंवला चूर्ण बहुत अच्छा तरीका है, आंवले का फायदा लेने लिये आप इसे किसी और फ्रूट्स के साथ भी ले सकते हैं |

आंवला जूस कैसे बनायें | How to Make Amla Juice in Hindi

  • आंवले का जूस बनाने के लिये सबसे पहले आप फ्रेश आंवला ले लें |
  • अब आंवले को काटकर इसकी गुठली अलग कर दें |
  • इसके बाद कटे हुए आंवले को मिक्सर या जूसर मे डालकर इसका जूस निकाल लें | और अब आपका जूस तैयार है |
  • आप इसे फ्रिज में रखकर कई दिनों तक इसका सेवन कर सकते हैं | यह जल्दी ख़राब नहीं होता |
  • इसे पीने के लिये आप इसमें नमक डालकर भी पी सकते हैं या फिर आंवला जूस में शहद डालकर पीने से यह फायदेमंद होता है |

kg आंवला में लगभग 500-600 ग्राम जूस निकलता है |

आंवला चूर्ण कैसे बनायें 

  • आंवला चूर्ण बनाने के लिये सबसे पहले आंवले को ठीक से धुल लें और फिर किसी सूखे कपडे से इन्हें पोछ लें |
  • अब आंवले को पतला-पतला काटकर इसकी गुठली निकाल कर अलग अलग कर दें |
  • अब किसी कपड़े में कटे हुए आंवले को फैला लें और इसके ऊपर से भी पतला कपड़ा डालकर इसे सूखने के लिये धूप में छोड़ दें |
  • लगभग 5-6 दिन तक ठीक से सूखने के बाद आंवले को मिक्सी के जार में डाल दें और इसे ठीक से बारीक पीस लें |
  • इसके बाद किसी पतले कपडे में इसे छान लें अब आपका चूर्ण बनकर तैयार है |

आंवले का तेल कैसे बनायें 

  • आंवले का तेल बनाने के लिये सबसे पहले आपको ताजे आंवले का जूस निकाल लेना है |
  • फिर किसी बर्तन में आंवला जूस और नारियल के तेल को एक साथ मिला लें |
  • अब इस मिश्रण को गैस में कम से कम 15-20 मिनट तक धीमी आंच में पकाएं |
  • ठीक से पकने के बाद इसे ठंडा होने के लिये छोड़ दें |
  • ठंडा होने के बाद इसे किसी पतले कपड़े से छान लें |
  • और अब आप इस तेल का उपयोग अपने बालों में कर सकते हैं |

आंवले का मुरब्बा कैसे बनायें 

आंवले का मुरब्बा बनाना बहुत ही आसान है इसके लिये –

  • आपको धुले हुए आंवले को लेकर उन पे छेद कर लेना है ताकि चासनी आंवले के अन्दर तक जा सके |
  • अब किसी बर्तन में 2 गिलास पानी को लेकर गैस में उबलने के लिये छोड़ दें पानी उबलने के बाद गैस को बंद कर दें |
  • अब गर्म पानी में आंवले को डालें  इसके साथ ही इसमें फिटकरी डाल दें और किसी बर्तन से ढक दें |
  • अब 1 से 2 घंटे के बाद आंवले को पानी से अलग कर दें और आंवले से भी पानी को निचोड़ ले |
  • अब आंवले को 3 से 4 घंटे के लिये धूप में सूखने के लिये रख देंगे धूप में आंवले को सुखाने के बाद, अब चासनी बनायेंगे |
  • चासनी बनाने के लिये हम पानी के बराबर मात्रा में चीनी डालकर इसे ठीक से पकाएंगे |
  • अब हम चाछनी में आंवला डालेंगे और इसके साथ ही इसमें 5 से 6 इलायची पीसकर डाल देंगे |
  • अब हम इसे ढक देंगे और 1 से 2 घंटे धीमी आंच में पकने के लिये छोड़ देंगे |
  • आधे से एक घंटे बाद आप देखेंगे की इसका रंग गुलाब जामुन जैसा दिखने लगा है और आंवला बहुत मुलायम हो चुका है तो अब आपका मुरब्बा बनकर तैयार है |

आंवले की चटनी कैसे बनायें 

आंवले की चटनी बनाने के लिये आपको इन चीज़ों की जरूरत पड़ेगी-

  • सामग्री
  • 3 से 5 आंवले
  • नींबू
  • हरा धनिया 50-100 ग्राम
  • 2 से 3 हरी मिर्च
  • स्वादानुसार नमक / काला नमक

बनाने की विधि :

  • चटनी बनाने के लिये सबसे पहले तो आंवला, हरी मिर्च, धनिया और नमक को मिक्सर में डालकर ठीक से पीस लें |
  • अब इस मिक्सर या पेस्ट को किसी बर्तन में निकल लें और अब आप इसमें नीबूं का रस मिलाकर खा सकते हैं |

अभी तक आपने पढ़ा आंवला के फायदे और नुकसान,आंवले का उपयोग अब आप इस लेख में पढ़ेंगे आंवला खाने या जूस पीने का सही समय और तरीका –

आंवला खाने या जूस पीने का सही समय और तरीका 

आप और हम आंवले का सेवन कई तरीकों से कर सकते हैं, आप इस लेख में जान ही चुके हैं लेकिन अब बात आती है की आंवला खाने या जूस पीने का सही समय क्या है जिससे की आंवला खाने के फायदे (Amla khane ke fayde in hindi) ज्यादा से ज्यादा मिल सके |

  • सुबह खाली पेट आंवला का सेवन करने से यह बहुत ही फायदेमंद होता है |
  • सुबह आंवले के जूस में शहद मिलाकर पीने से यह और भी लाभकारी हो जाता है |
  • आंवले के चूर्ण को सुबह खाली पेट और रात में गर्म पानी के साथ सेवन करने से यह बहुत फायदेमंद होता है |

आंवले को सुरक्षित कैसे रखें 

आंवले को कुछ तरीकों के द्वारा इसे लम्बे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं  जैसे – आंवले का रस निकालकर, आंवले का चूर्ण बनाकर, आंवले का मुरब्बा और आंवले का अचार बनाकर इत्यादि तरीकों से आप आंवले के फायदे (Amla ke fayde) लेने के लिये इसे लम्बे समय तक बनाये रख सकते हैं |

आंवला के फायदे और नुकसान – आंवला के नुकसान (SideEffect of Amla in Hindi)

आंवला एक आयुर्वेदिक औषधीय है आंवला के फायदे और नुकसान आंवला का सेवन करना पूरे शरीर के लिये बहुत फायदेमंद होता है लेकिन इसके बावजूद इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, यही आप आंवले का सेवन अधिक मात्रा में करते है, तो यह आपके लिये नुकसानदायक साबित हो सकता है |

  • आंवले में फाइबर पाया जाता है,जिसके परिणामस्वरूप इसका अधिक सेवन करने से डायरिया होने का खतरा बढ़ सकता है |
  • गर्भवती महिलाओं को आंवले का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिये |
  • ज्यादा मात्रा में या फिर लम्बे समय तक इसका सेवन करने से पथरी होने का खतरा हो सकता है |
  • सर्दी में खाली आंवला जूस का सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है इसके साथ शहद मिलाकर सेवन करें |
  • आंवले के ज्यादा सेवन से कब्ज की समस्या हो सकती है इसलिए इसका सेवन पानी के साथ करें |
  • आंवले का अधिक सेवन करने से पेशाब में जलन हो सकती है |
  • जिन्हें भी किडनी से जुडी कोई समस्या है उन्हें आंवला का सेवन नहीं करना चाहिये |
  • हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों को आंवले का सेवन डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही करनी चाहिये |

आंवला के फायदे और नुकसान FAQ

Que : आंवले की तासीर क्या होती है?

Ans : आंवले की तासीर ठंडी होती है |

Que : क्या कच्चा आंवला खाना नुकसानदायक होता है?

Ans : कच्चे आंवले के फायदे और भी ज्यादा फायदेमंद और लाभकारी होते हैं |

Que : आंवले का सेवन करने का सही समय क्या है?

Ans : सुबह खाली पेट आंवले का सेवन करना सबसे फायदेमंद होता है |

Que : क्या बच्चे आंवले का सेवन कर सकते हैं?

Ans : 5 साल से कम उम्र के बच्चों को इसका सेवन न कराएँ |

Que : क्या लकवा के मरीज आंवला का सेवन कर सकते हैं?

Ans : लकवा के मरीज आंवले का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रुर लें |

Que : क्या भिन्डी और आंवला एक साथ खा सकते हैं?

Ans : हाँ, आप भिन्डी के साथ आंवला खा सकते हैं |

तो दोस्तों, ‘आंवला के फायदे और नुकसान‘ इस लेख को पढ़ पर कैसा लगा हमें कमेन्ट में बताएं और स्वस्थ रहने के लिये आप भी आंवला का सेवन करें | धन्यवाद


एलोवेरा के फायदे और नुकसान – यहाँ Aloevera के विभिन्न Benefits और Side Effects को जानें!



एलोवेरा जिसे घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है | आयुर्वेद में इसे औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है, यह अपने औषधीय गुणों के कारण ही जाना जाता है, एलोवेरा की उत्पत्ति उत्तरी अफ्रीका में हुई थी | एलोवेरा का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी देखा जाता है, एलोवेरा का उपयोग (use of aloevera in hindi) शरीर को स्वस्थ रखने, चेहरे और बालों के लिये विशेष रूप से किया जाता है | इस लेख को अंत तक पढ़ें और एलोवेरा के फायदे और नुकसान (Benefits and Side Effects of Aloevera in Hindi) को विभिन्न औषधीय गुण के साथ जानें।

एलोवेरा के फायदे और नुकसान | Benefits and Side Effects of Aloevera in Hindi

घृतकुमारी/एलोवेरा के पौधों में तने बहुत ही छोटे होते हैं | यह एक रसीला और गूदेदार पौधा होता है | यह नीचे से फैलता जाता है | यदि एलोवेरा के पत्तियों की बात करें तो इनकी लम्बाई लगभग 50 से 100 CM तक होती है | इनकी पत्तियां मोटी, गूदेदार और नुकीली होती हैं, लेकिन ये मुलायम होती हैं | एलोवेरा के पत्तियों का रंग हरा या हल्का सा पीले रंग का होता है | पत्तियों में हल्के सफ़ेद रंग के छोटे धब्बे भी देखे जाते हैं | पत्तियों के किनारे पर नुकीले भाग निकले होते हैं |

एलोवेरा की खेती पूरी दुनिया में की जाती है | दुनिया भर में इसकी 275 प्रजातियाँ हैं | प्रायः लोग अपने घरों में, बगीचों में, छतों और बालकनी में एलोवेरा को घर की शोभा बढाने के लिये लगाते हैं | एलोवेरा औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है | एलोवेरा के फायदे और नुकसान (Benefits and Side Effects of Aloevera in Hindi) जानने के बाद आपको आश्चर्य जरूर होगा | इसके सेवन से आप अपने और अपने परिवार की बहुत सी बीमारियों को दूर कर सकते हैं | जिसे आप इस लेख में जानेंगे |

एलोवेरा के अन्य नाम | Different Name of Aloevera in Hindi)

बहुत से लोग एलोवेरा को घृतकुमारी या एलोवेरा के नाम से जानते हैं | लेकिन दुनिया भर में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है | एलोवेरा का वानस्पतिक नाम एलो बार्बाड़ेंसीस मिल (Aloe barbadensis mil) है, एलोवेरा का सामान्य नाम एलोवेरा, घी कुमारी, कुमारी, ग्वारपाठा है |

एलोवेरा –

हिन्दी में घीकुवांर, ग्वारपाठा, घीग्वार
संस्कृत में गृहकन्या, कुमारी, कन्या, घृतकुमारी
अंग्रेजी में Aloevera, कॉमन एलो(common aloe), बारबडोस, मुसब्बार
मराठी में कोराफंटा, कोरफड (korfhad)
पंजाबी में कोरवा (Korwa), कोगर (Kogar)
गुजराती में कड़वी कुवर, कुंवार
बंगाली में घृतकुवारी
तमिल में अंगनी, कत्तालै (Kattale)
तेलगु में कलवंद
मलयालम में छोटू कथलाई
कन्नड़ में लोलिसर
अरबिक में तसाबार अलसी

वैज्ञानिक वर्गीकरण –

  • नाम – ग्वारपाठा
  • जगत: – पादप
  • वंश: – एलो
  • वर्ग: – लिलीओप्सिडा
  • जाती: – Aloevera
  • कुल: – एस्फोडिलसी
  • गण: – एस्पैरागलेस
  • विभाग: – मैग्नोलिओफाईटा
  • उपयोगी भाग – पत्तियां



एलोवेरा  के पौष्टिक तत्त्व | Nutritional Value of Aloevera in Hindi

  • विटामिन्स – विटामिन- ए, ई, विटामिन- सी, B-1, B-2, B-6, B-12, नियासिन, फ़ॉलिक एसिड
  • मिनरल – कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, कैल्शियम, सोडियम, फैट, सैचुरेटेड, प्रोटीन

एलोवेरा मे बहुत से पोषक तत्त्व और विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं | एलोवेरा में विटामिन– ए, ई, विटामिन- सी, B-1, B-2, B-6, B-12, नियासिन, फ़ॉलिक एसिड और मिनरल मौजूद होते हैं, इसके साथ ही एलोवेरा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज भी पाए जाते हैं | इसके अलावा एलोवेरा में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, गिब्बेरेल्लिंस और औक्सिंस जैसे गुण उपस्थित होते हैं| जो कि चोट लग जाने पर घाव को जल्दी भरने में मदद करते हैं|

एलोवेरा के औषधीय गुण | Medicinal Properties of Aloevera in Hindi

एलोवेरा में बहुत से औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके चलते यह स्वास्थ्य के लिये बहुत जरूरी होता है, इसमें उपस्थित विटामिन और मिनरल के कारण यह त्वचा सम्बन्धी समस्या और बालों के लिये बहुत ही लाभकारी होता है, एलोवेरा के सेवन से पेट से जुडी समस्या भी दूर होती है,और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है आप इस लेख में आगे जानेंगे एलोवेरा के फायदे|

गिलोय के फायदे, नुकसान और औषधीय गुण

एलोवेरा के फायदे और नुकसान – एलोवेरा के फायदे (Benefits of Aloevera in Hindi

1. पाचन तन्त्र में एलोवेरा –

एलोवेरा के फायदे में यह पेट से जुडी समस्या या पाचन तन्त्र के लिये बहुत जरूरी और उपयोगी होता है ,एलोवेरा के जूस का सुबह खाली पेट सेवन करने से पेट में कब्ज, गैस और पेट दर्द जैसी समस्या से छुटकारा मिलता है ,एलोवेरा का प्रतिदिन सेवन करने से यह पेट को साफ रखता है और आंतो को स्फूर्ति प्रदान करता है | चूँकि एलोवेरा में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-अल्सर जैसे गुण पाए जाते हैं,जिससे यह पेट से जुड़ी समस्या को दूर करता है |

2. लीवर में एलोवेरा के फायदे –

  • एलोवेरा का सेवन करने से लीवर से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं ,लीवर से जुड़ी समस्या से निदान पाने के लिये प्रतिदिन सुबह शाम एलोवेरा के जूस को 10-20 ML तक इसका सेवन करना चाहिये |
  • एलोवेरा का सेवन लीवर को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे लीवर अच्छी तरह से काम करने लगता है |
  • इसके सेवन से पेट साफ रहता है, तथा मल और वात से जुडी परेशानियाँ भी ठीक हो जाती हैं |

3. मधुमेह (डायबिटीज) में एलोवेरा के लाभ –

डायबिटीज या मधुमेह के मरीजों के लिये एलोवेरा बहुत लाभकारी होता है, एलोवेरा शुगर को कम करने के लिये जाना जाता है ,इसमें मौजूद ग्लूकोमांस के कारण यह रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है |

4. कोलेस्ट्रोल में एलोवेरा के फायदे –

एलोवेरा में हाइपोकोलेस्ट्रोमिक गुण (Hypocholesterolemic effect) पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रोल को कम करता है, इसलिए कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिये एलोवेरा का सेवन किया किया जा सकता है, एक रिपोर्ट के अनुसार एलोवेरा को प्रतिदिन सेवन करने से ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस भी कम हो सकता है, साथ ही लीवर में कोलेस्ट्रोल को भी कम करता है |

5. कब्ज के लिये एलोवेरा –

आज जिस तरह का प्रदूषित खान पान है, जिसके वजह से पेट जुड़ी बहुत सी परेशानियाँ हो जाती हैं, उन्ही में से एक है कब्ज की समस्या | कब्ज के मरीज बहुत तरह की दवाइयां मेडिकल से लेते है, फिर भी यह समस्या दूर नहीं होती है  तो यहाँ आप जानेंगे कब्ज में एलोवेरा के फायदे, एलोवेरा मेंलैक्सेटिव (Laxatives) गुण पाया जाता है जो कि पेट को साफ करता है | यदि आप प्रतिदिन एलोवेरा जूस का सेवन करें तो कुछ ही दिनों में कब्ज की समस्या से छुटकारा मिल सकता है|

6. मुहासों के लिये एलोवेरा के फायदे –

चेहरे पर मुहांसे निकलना यह एक आम समस्या है,जो कि बहुत से कारणों पर निर्भर करता है, जैसे प्रदूषण की वजह से, खान पान की वजह से तथा चेहरे का अधिक ऑयली (oily) होना इत्यादि, तो मुहासों से छुटकारा पाने के लिये उन पर दिन में और रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल को लगाएं,इससे मुंहासे निकलना बंद हो जायेंगे और त्वचा भी सुन्दर एवं आकर्षक बनेगी |

7. बालों के लिये एलोवेरा के फायदे –

आपने इस लेख में पढ़ा ही है की, एलोवेरा में बहुत प्रकार के पोषक तत्त्व पाए जाते हैं | जो बालों के लिये भी बहुत जरूरी होते हैं यदि आपके शरीर में खुजली होती है, बालों में रुसी, बाल झड़ने जैसी समस्या है, तो आपको भी एलोवेरा का उपयोग करना चाहिये | यह बालों में रुसी दूर करके उन्हें झड़ने से रोकता है,और मजबूत बनाता है, सिर पर एलोवेरा लगाने से बालों को पोषक मिलता है |

एलोवेरा को आप मोइस्चराइजर या कंडीशनर की तरह यूज (Use) कर सकते हैं | एलोवेरा जेल में आधे नीबूं का रस ठीक से मिलाकर इस मिश्रण को बालों पर लगाएं,लगाने के बाद आधे घंटे तक इसे छोड़ दें | इसके बाद इसे शैम्पू से धोलें इसे आप हफ्ते में 2-3 बार लगा सकते हैं |

8. वजन घटाने में एलोवेरा के लाभकारी गुण –

आज के समय में लोग सबसे ज्यादा अपने अधिक वजन यानि मोटापे परेशान हैं, लेकिन यहाँ आप जानेंगे वजन कम करने में एलोवेरा के फायदे ,यदि एलोवेरा के जूस का प्रतिदिन सेवन किया जाये तो इससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है | क्योंकि एलोवेरा में एंटी-ऑक्सीडेंट और खनिज उपलब्ध होते हैं जो चर्बी को कम करते हैं, वजन को बढ़ने से रोकते हैं साथ ही वजन को भी नियंत्रित करते हैं |

9. मसूड़ों और दांतों में एलोवेरा के फायदे –

यह तो आप जानते ही हैं की एलोवेरा में बहुत से खनिज और विटामिन्स होते हैं | अर्थात एलोवेरा पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है जो कि आपके मसूड़ों और दांतों के लिये लाभकारी हो सकता है, मसूड़ों से खून आने की समस्या के लिये आप मसूड़ों में एलोवेरा जेल से मालिस करें, ब्रश करते समय आप ब्रश में एलोवेरा का पाउडर भी मिला सकते हैं इससे मसूड़े और दांत स्वस्थ रहते हैं |

10. प्रतिरक्षा प्रणाली में एलोवेरा –

एलोवेरा में ब्रैडीक्नास मौजूद होती है, जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करने में मदद करता है, यह शरीर में हानिकारक जीवाणुओं को मरता है |

11. सूजन में एलोवेरा के फायदे –

एलोवेरा में एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है | यह एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में सूजन को कम करने में मददगार होता है हम सभी के शरीर में सूजन होने का कारण ऑक्सीडेटिव में हानि के कारण होता है ,और शरीर में उपस्थित फ्री रेडिकल्स भी इसके जिम्मेदार होते हैं | इन फ्री रेडिकल्स की वजह से हमारे शरीर को बहुत हानि होती है लेकिन एलोवेरा का जूस पीने से इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है, एलोवेरा के जूस का सेवन करने से शरीर की सूजन कम हो जाती है इससे शरीर का दर्द भी ठीक होता है |

12. गठिया और जोड़ों के दर्द में एलोवेरा –

जैसे–जैसे उम्र बढती है तो जोड़ों मे दर्द एवं गठिया की शिकायत होने लगती है, इससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं, तब इसके लिये एलोवेरा का सेवन करना चाहिये ,यह जोड़ों के दर्द में लाभकारी होता है | एक रिसर्च के अनुसार एलोवेरा ओक्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) के इलाज में भी कारगर शाबित होता है, एलोवेरा में पाए जाने वालेएंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण इसके जूस का सेवन करने से हड्डियों के दर्द में राहत मिलती है |

13. सर्दी-जुकाम में एलोवेरा के फायदे –

बदलते मौसम के कारण सर्दी-जुकाम होना आम सी बात है | इन छोटी मोटी समस्याओं के लिये आपको मेडिकल जाने की जरूरत नहीं है, इसके बदले आपको आयुर्वेदिक उपचार या प्रकृति का सहारा लेना अच्छा होगा सर्दी-जुकाम होने पर एलोवेरा के जूस का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है |

साथ ही एलोवेरा का उपयोग करके सूखी खांसी से भी छुटकारा पा सकते हैं ,इसके लिये किसी बर्तन में एलोवेरा लेकर उसमे लगभग 2-3 चम्मच शहद मिलाकर इसे दिन में 2-3 बार सेवन करें,आप देखेंगे की जल्द ही आपको खांसी से छुटकारा मिल जाएगा |

14. नेत्रों में एलोवेरा के फायदे –

एलोवेरा या घृतकुमारी का उपयोग आँखों के लिये करने पर बहुत लाभकारी होता है | इससे आँखों में जलन की समस्या दूर होती है, यह आँखों में सूजन को भी कम करने में लाभकारी होता है इसके लिये आप एलोवेरा के गुदे को आँखों पर लगाएं या एलोवेरा के मोटे गुदे को आंख बंद करके कुछ देर तक रखा रहने दें |

15. पेशाब/मूत्र रोग में एलोवेरा के फायदे –

मूत्र रोग के मरीजों में भी एलोवेरा के फायदे देखे जाते हैं, जिन्हें भी पेशाब करते वक्त तकलीफ अथवा जलन की समस्या होती है ,उन्हें एलोवेरा में चीनी मिलाकर पीना चाहिये या फिर एलोवेरा के 10-15 ग्राम ताजे गूदे में चीनी मिलाकर इसे खायें  ऐसा करने से पेशाब में होने वाली जलन से राहत मिलता है |

16. कान दर्द में आराम दिलाये एलोवेरा –

कान में दर्द होने पर आप एलोवेरा के रस को हल्का गर्म कर लें, फिर इसे कान में डालें | याद रहे : जिस कान में दर्द है रस को उसके दूसरी तरफ के कान में दो बूँद डालें, ऐसा करने से कान के दर्द में आराम मिलता है |

17. जलन में आराम दिलाये –

यदि आप कहीं जल जाते हैं, तो जले हुए स्थान पर एलोवेरा का जेल लगाने से जलन से राहत मिलता है |

एलोवेरा के उपयोगी हिस्से 

लगभग एलोवेरा के सभी हिस्से उपयोगी होते हैं |

  1. पत्ते
  2. जड़
  3. फूल



एलोवेरा कहाँ पाया जाता है ? 

यदि हम भारत में एलोवेरा की बात करें, तो यह भारत में सभी जगह पर पाया जाता है, इसे आप अपने घर पर भी लगा सकते हैं इसे लगाना काफी आसान होता है | इसकी खेती सूखी और बलुई मिट्टी पर की जाती है |

एलोवेरा के सेवन की मात्रा 

आपको एलोवेरा के काढ़े अथवा जूस को 30-50 ml तक लेना चाहिये ,यदि आप इसे सुबह शाम दोनों समय ले रहें हैं तो समय में इसे 20-25 ml तक ले सकते हैं |

एलोवेरा जूस कैसे बनायें 

सबसे पहले एलोवेरा जूस बनाने के लिये कुछ सामग्री चाहिये

सामग्री :

  • एक बर्तन या कटोरी
  • बड़ा सा एलोवेरा (घृतकुमारी)
  • लगभग 2 कप पानी
  • मिक्सर या ब्लेंडर
  • और एक चम्मच

बनाने की विधि :

  • सबसे पहले एलोवेरा के पत्ते को ठीक से धो लें |
  • अब किसी चम्मच या चाकू से काटकर इसके गूदे को निकाल लें |
  • जूस बनाने के लिये एलोवेरा में 2 कप पानी डालकर इसे मिक्सर से मिला लें और इस जूस को एक गिलास में डाल लें, अब आपका जूस तैयार है |

एलोवेरा का उपयोग | Use of Aloevera in Hindi

आइये अब जान लेते हैं की एलोवेरा का उपयोग किन तरीकों से कर सकते हैं –

  • आप एलोवेरा जूस को ऐसे ही पी सकते हैं या फिर इसमें थोडा सा नीबूं मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं |
  • एलोवेरा को आप चाहें तो दूसरे जूस के साथ मिलाकर पी सकते हैं इसका सेवन आंवला या गिलोय के साथ करने पर बहुत फायदेमंद होता है |
  • एलोवेरा जेल का उपयोग चेहरे पर किया जाता है इससे चेहरे की चमक बढती है |
  • एलोवेरा का उपयोग बालों के लिये कंडीशनर के रूप में किया जाता है |
  • शरीर में जल जाने या कट जाने पर एलोवेरा का उपयोग किया जाता है |
  • एलोवेरा का उपयोग टूथपेस्ट बनाने में भी किया जाता है |
  • एलोवेरा मे 1-2 चम्मच शहद मिलाकर भी आप इसका सेवन कर सकते हैं |

एलोवेरा ख़राब होने से कैसे बचाएं 

अब हम बात करते हैं की एलोवेरा लम्बे समय तक कैसे बनाये रखें अर्थात इसे ख़राब होने से कैसे बचा सकते हैं |

  • एलोवेरा के पत्ते को काटकर आप अपने जरूरत के अनुसार उपयोग कर सकते हैं, यह ख़राब नहीं होता है |
  • एलोवेरा को किसी प्लास्टिक में बंद करके फ्रिज में रख सकते हैं |
  • एलोवेरा जेल को फ्रीजर में रख कर जमा सकते हैं |
  • नीबूं में विटामिन होता है, तो यदि आप इसे एलोवेरा में मिला देते हैं तो इससे एलोवेरा कई दिनों तक सुरक्षित रह सकता है |

एलोवेरा के फायदे और नुकसान – एलोवेरा के नुकसान (Side Effects of Aloevera in Hindi)

एलोवेरा का उपयोग करना बहुत फायदेमंद और सुरक्षित होता है | परन्तु इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें आपको जानना चाहिये |

  • एलोवेरा का सेवन करने से कुछ लोगों को एलर्जी होने लगती है जिसके परिणामस्वरूप उनके शरीर में खुजली होने लगती है,और शरीर में दाग निकलने लगते हैं |
  • जिन्हें पीलिया है, उन्हें एलोवेरा का सेवन नहीं करना चाहिये | यह आपकी समस्या को बढ़ा सकता है |
  • एलोवेरा में लेटेकस पाया जाता है जो आपके स्वास्थ को बिगाड़ सकते हैं  इससे आपको पेट में दर्द, आंतों में परेशानी, एपेन्डीसाईंटिस, कोलाईटिस और डाईवरटीकलोसिस जैसी समस्याएँ हो सकती हैं |
  • एलोवेरा का सेवन लगातार ज्यादा समय तक ना करें क्योंकि लगातार लम्बे समय तक इसका सेवन करने से कैंसर का खतरा हो सकता है |
  • जिन्हें भी दिल से जुडी कोई परेशानी है या वो कोई मेडिसिन ले रहे हैं तो उन्हें एलोवेरा का सेवन नहीं करना चाहिये | दिल के मरीजों को इसका सेवन करने से उन्हें हानि हो सकती है |
  • बुजुर्गों और बच्चों को इसका सेवन बहुत सीमित मात्रा में अथवा कम करना चाहिये |
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं एलोवेरा का सेवन न करें | इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें |

इस लेख में आपने एलोवेरा के फायदे और नुकसान (Advantages and disadvantages of aloe vera in Hindi) दोनों के बारे में जाना एलोवेरा के बहुत से फायदे हैं, यह एक आयुर्वेदिक औषधीय है जो बालों और त्वचा के लिये बहुत ही लाभकारी होता है | लेकिन कुछ लोग इसका अधिक और जल्दी लाभ लेने के लिये ज्यादा मात्रा में सेवन करने लगते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिये ऐसा करने पर उन्हें नुकसान हो सकता है, इसलिए इस बात का जरूर ध्यान दें की एलोवेरा का सेवन एक निश्चित मात्रा में ही करें |

FAQ

Que : एलोवेरा की तासीर क्या होती है?

Ans : एलोवेरा की तासीर गर्म होती है |

Que : क्या एलोवेरा में शुगर होती है?

Ans : नहीं, एलोवेरा (घृतकुमारी) के जूस में ज्यादा शुगर नहीं होती है |

Que : एलोवेरा पीने का सही समय क्या है?

Ans : एलोवेरा सुबह खाली पेट पीना बहुत फायदेमंद होता है |

Que : क्या योनि की सफाई के लिये एलोवेरा नुकसानदायक है?

Ans : नहीं, योनि की सफाई के लिये एलोवेरा का उपयोग किया जा सकता है | क्योंकि एलोवेरा में एंटी-बैक्टीरियल एवं एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं | संक्रमण और इन्फेक्शन में मददगार होते हैं |

Que : क्या एलोवेरा जूस को फ्रिज में रख सकते हैं?

Ans : हाँ, आप एलोवेरा जूस को फ्रिज में रख सकते हैं | इससे यह ताजा बना रहता है |

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गिलोय के फायदे, नुकसान और औषधीय गुण के बारे में विवरण जानें!



गिलोय को कौन नहीं जानता है| इसके गुण और फायदों से लगभग सभी लोग परिचित है| लेकिन जब से हमारे देश में कोरोना जैसी बीमारी आई है तब से इसका महत्त्व कई गुना बढ़ गया है, और लोगों द्वारा इसकी खरीददारी कई गुना बढ़ गई है| गिलोय जो की स्वास्थ्य के लिये बहुत ही अच्छा माना जाता है और इसका नियमित रूप से सेवन करने से बहुत से फायदे होते है इसका वर्णन आयुर्वेद में बहुत अच्छे से आता है | आज के समय में गिलोय और आयुर्वेद का बहुत प्रचार हुआ है इसके बावजूद भी बहुत से लोग इससे अवगत नहीं हैं, इसलिए ही आपकी सहायता के लिए आज हम इस लेख में आपको गिलोय के फायदे और नुकसान और गिलोय के औषधीय गुण क्या है के बारे में सभी आवश्यक विवरण प्रदान करेंगे। तो आगे बढिये और इस लेख के माध्यम से गिलोय के फायदे और नुकसान (Advantages and disadvantages of Giloy in Hindi) के बारे में जानें।

हालाँकि, गिलोय स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसके सेवन से बहुत से रोग अथवा बीमारी खत्म हो सकती हैं जैसे – आँखों की समस्या , इम्युनिटी बढ़ाने में , खांसी , बुखार इत्यादि से राहत दिलाता है |

यहाँ विटामिन और उनके स्रोत की सूची पढ़ें।

गिलोय क्या होता है | What is Giloy in Hindi

गिलोय को अमृता या अमरबेल के नाम से भी जाना जाता है देखने में इसका तना रस्सी जैसा होता है इसके पत्ते मुलायम होते हैं और इनके पत्तों का आकार कुछ पान के पत्तों की तरह होता है | हालांकि , गिलोय के पत्ते पान के पत्ते से छोटे और पतले होते हैं जबकि इनके फल मटर के दाने के जितने होते हैं | इसके फल गुच्छों में ही लगते हैं और पकने के बाद यह लाल रंग के हो जाते हैं | गिलोय आयुर्वेद में बहुत अच्छी औषधीय मानी जाती है इसे जंगलों में पहाड़ की चट्टनों और पेड़ों में भी इसे देखा जा सकता है | गिलोय में एक बहुत अच्छी खूबी यह होती है की यह जिस भी पेड़ में चढ़ती है उस पेड़ के कुछ गुण इसमें भी आ जाते हैं, यही कारण है की नीम के पेड़ में चढ़ी हुई गिलोय को औषधीय के लिये सबसे अच्छा माना जाता है | इसलिए नीम गिलोय सर्वोत्तम होती है |

गिलोय में पोषक तत्त्व | Nutrients in Giloy in Hindi

गिलोय में बहुत तरह के पोषक तत्त्व पाए जाते हैं जैसे की गिलोय में कैल्शियम , मैग्नीज , आयरन , कॉपर , फास्फोरस , जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है | इसके अलावा इसमें गिलोइन नामक ग्लोकोसाइड और पामेरिन और टीनोस्पोरिक एसिड पाया जाता है | और इसके साथ साथ गिलोय में स्टार्च भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है |

गिलोय की तासीर

गिलोय की तासीर प्रायः गर्म होती है | इसलिए इसका उपयोग सर्दी के मौसम में ज्यादा होता है | यह सर्दी , जुकाम और बुखार में बहुत फायदेमंद होता है | इसका गर्मियों में अधिक सेवन नहीं करना चाहिये | यदि इसके सेवन से जलन जैसी समस्या होती है तो गिलोय को आंवले के साथ पीने से लाभ मिलता है |

गिलोय की प्रजातियाँ | Species of Giloy in Hindi

गिलोय की कुछ प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. Tinosporacordifolia miers (giloy)
  2. Tinospora sinensis merr.
  3. Tinosporacrispa hook. F & Thomson.

यहाँ कोरोना वायरस के घरेलू एवं मेडिकल उपचार पढ़ें।

गिलोय के अन्य नाम | Other Name of Giloy

गिलोय के अलावा भी इसे बहुत से नामों से जाना जाता है जो इस प्रकार से हैं –

  • संस्कृत में – अमृता , मधुपर्णी , अमृतवल्ली , गुडूची
  • हिन्दी में – गिलोय (giloy) , गडूची , अमृता
  • अंग्रेजी में – इण्डियन टिनोस्पोरा (Indian tinospora) , मून सीड (moon seed) , टिनोस्पोरा (tinospora)
  • पंजाबी में – पालो (palo) , गिलोगुलरिच (gilogularich) , गरहम
  • गुजराती में – गुलवेल (gulvel), गालो (galo)
  • मराठी में – अम्बरवेल (ambarvel)
  • तेलगु में – तिप्पतीगे (tippatige) , गुडूची
  • मलयालम में – अमृतु (amritu) , पेयामृतम , चिंतामृतु
  • तमिल में – अमृदवल्ली , शिन्दिलकोडि
  • नेपाली में – गुर्जो



गिलोय के फायदे और नुकसान | Giloy Advantages and disadvantages in Hindi

नीचे स्क्रॉल करें और गिलोय के फायदे और नुकसान (Giloy Advantages and disadvantages in Hindi) जानें।

गिलोय के फायदे | Benefits of Giloy in Hindi

अब जानते हैं गिलोय के फायदों के बारे में –

1. डायबिटीज में गिलोय के फायदे 

कई लोगों को यह शंका होती है की डायबिटीज में गिलोय का उपयोग करें या न करें, आप डायबिटीज में गिलोय का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि गिलोय में हाइपो ग्लेसिमिक गुण पाया जाता है जोकि ब्लड में शुगर लेवल को कम करता है | इसलिए यह डायबिटीज में अच्छा माना गया है | डायबिटीज में गिलोय का उपयोग आंवले और हल्दी के साथ कर सकते है |

2. चिकनगुनिया में फायदेमन्द 

चिकनगुनिया बुखार के बाद रोगी को जोड़ों में दर्द जैसी समस्या बनी रहती है | तो इस मामले में गिलोय प्रकृति द्वारा दिया गया एक उपहार है | शरीर में प्लेट्स को बढाने के लिये गिलोय बहुत असरदार साबित होता है |

3. बुखार में सहायक है गिलोय

दोस्तों गिलोय सभी प्रकार के बुखार से राहत दिलाता है यह विशेष रूप से डेंगू , चिकनगुनिया , स्वाइनफ्लू जैसे वायरस से लड़ने में सहायक होता है और यदि आपके शरीर में कोई साइड इफ़ेक्ट हो जाता है तो आपको गिलोय का सेवन जरूर करना चाहिये |

4. रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिलोय

गिलोय का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है, इसलिए सभी को सुबह गिलोय का सेवन जरूर करना चाहिये | इसके सेवन से शरीर में कमजोरी अथवा दुर्बलता दूर होती है यह शरीर को अन्दर से मजबूत बनाता है |

5. पाचन शक्ति में गिलोय के फायदे 

गिलोय पाचन शक्ति के लिये अच्छा माना जाता है | यदि आपको भी पेट से जुडी कोई समस्या है जैसे कि – ठीक से पेट साफ़ नहीं होता , भोजन पच नहीं पाता या फिर आपकी पाचन शक्ति कमजोर है तो ऐसे में आपको भी गिलोय का सेवन करना शुरू कर देना चाहिये |

6. रक्त को स्वस्थ रखे गिलोय

रक्त को शुद्ध और स्वस्थ रखने के लिये भी गिलोय का उपयोग किया जाता है | इसलिए गिलोय का नियमित सेवन करना चाहिये क्योंकि जब रक्त साफ़ रहेगा तो आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा |

7. इम्युनिटी को बढ़ाने में गिलोय के फायदे 

गिलोय का सेवन करने से आपकी इम्युनिटी पॉवर मजबूत होती है | इसके परिणाम स्वरुप आपको जल्दी कोई बीमारी नहीं होती है क्योंकि यह रोगों से लड़ने में आपकी मदद करता है|

8. स्तन्यशोधक के लिये गिलोय

गिलोय का सेवन करने से यह दूध की क्वालिटी को बढाता है इसलिए महिलाओं को डॉक्टरों से परामर्श लेकर इसका सेवन करना चाहिये |

9. कफ में उपयोगी है गिलोय 

इसके सेवन से यह कफ को कम करता है, गिलोय प्रायः वेट (wet) कफ और ड्राई (dry) कफ दोनों में असरदार होती है | गले में कफ हो जाने से गले में सूजन और दर्द जैसी समस्या सामने आने लगती है | तो कफ से छुटकारा पाने के लिये आप लोगों को गिलोय का सेवन करना चाहिये |

10. जलन सम्बंधी समस्या में गिलोय के फायदे 

शरीर में कभी – कभी जलन होने लगती है या फिर पेशाब में जलन जैसी समस्या होने लगती है तो आपको भी सुबह उठते हि गिलोय का सेवन करना शुरू कर देना चाहिये , यह जलन से छुटकारा दिलाता है |

11. तृष्णा को संतुलित करता है गिलोय 

कई लोगों को तृष्णा या बार–बार पानी पीने की आदत होती है अथवा ऐसा कहें की उन्हें बार – बार पानी पीने की समस्या हो जाती है | तब यदि वो गिलोय का सेवन करते हैं तो वह इसे कन्ट्रोल करता है |

12. एनीमिया को दूर करने में गिलोय के फायदे 

कभी–कभी शरीर में ठीक से रक्त का निर्माण नहीं हो पता है या फिर किसी कारण से शरीर में रक्त की कमी हो जाने में कारण कमजोरी अथवा एनीमिया जैसी समस्या हो जाती है | ऐसे में गिलोय बहुत फायदेमन्द होता है |

13. उम्र में चमत्कारी 

बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनकी उम्र उनकी उम्र से ज्यादा दिखने लगती है | तो ऐसे में गिलोय का सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा मिलता है और साथ ही चेहरे में चमक आती है |

14. त्वचा से जुडी समस्या में 

कई लोगों को त्वचा (Skin) से जुडी समस्या बनी ही रहती है जैसे चेहरे में झुर्रियां पड़ना , चेहरे का ग्लो कम हो जाना और इसके साथ ही शरीर में खुजली जैसी समस्या होने लगती है | तो गिलोय का सेवन करने से इन सभी प्रकार की समस्या से राहत पा सकते हैं |

15.सफ़ेद दाग/चर्म रोग में –

शरीर में सफ़ेद दाग होने पर खान – पान का बहुत ध्यान रखना होता है | आपको सुबह और शाम ताज़ा गिलोय और एलोवेरा का सेवन करना चाहिये |

यहाँ काजू के फायदे और नुकसान पढ़ें।

गिलोय का सेवन कब और किसे करना चाहिये | When and who should consume Giloy in Hindi

वैसे तो गिलोय का सेवन हम सभी को सुबह उठकर करना चाहिये क्योंकि यह स्वस्थ के लिये अच्छा होता है | लेकिन गिलोय का सबसे अधिक उपयोग डेंगू , चिकनगुनिया जैसे बुखार अथवा गले के लिये बहुत अधिक किया जाता है | यदि आपको डायबिटीज की समस्या है , आपका पाचन तन्त्र ठीक नहीं है या फिर आपकी इम्युनिटी कमजोर है तब आपको गिलोय का सेवन जरूर करना चाहिये |

गिलोय का काढ़ा कैसे बनायें | How to make Decoction of Giloy in Hindi

गिलोय का काढ़ा बनाने की विधि कुछ नीचे इस प्रकार दी गई है –

  1. सबसे पहले तो आपको गिलोय की लगभग 1 फिट की डंडी लेनी है, फिर आप उसे ठीक से धो लें और उस डंडी को डेढ़ से दो में काट लें , इसके बाद गिलोय की छोटी छोटी डंडी को कूटनी या खलबट से ठीक से कूट लें |
  2. अब आपको एक बर्तन में लगभग 250ml पानी लेना है और उसमे गिलोय डालकर उसे ठीक से चूल्हे अथवा गैस में उबाल लेना है | कुछ समय उबलने के बाद अब आपका स्वरस तैयार हो जायेगा | अब आप इसे किसी छन्नी से गिलास में छान लें और इसका सेवन करें, आप चाहें तो इसमें शहद को भी मिलाकर सेवन कर सकते हैं |
  3. कटे हुए गिलोय को 250-300ml पानी में डालें और इसे उबलने के लिये गैस में रख दें. फिर इसमें आधा चम्मच हल्दी डालें , फिर अदरक को भी कूट कर डाल दे और तुलसी की कुछ पत्तियां भी इसमें डाल दे | अब इन्हें ठीक से उबल जाने दें और ठीक से उबलने के बाद आप इसे छानकर इसका सेवन कर सकते हैं |



गिलोय का सेवन कितना करें | How much to consume Giloy in Hindi

गिलोय के सेवन में यदि आप गिलोय रस (juice) ले रहें हैं तो आप 20 मिली तक इसे ले सकते हैं | और यदि इसका सेवन काढ़े के रूप में करते हैं तो इसे 50 मिली से 100 मिली तक ले सकते हैं |

गिलोय के नुकसान | Side Effect of Giloy in Hindi

गिलोय के सेवन से जितने फायदे हैं | इसके साथ ही इसके सेवन में कुछ सावधानियां रखनी भी बहुत जरूरी है | नहीं तो आपको इसके सेवन से नुकसान भी हो सकता है तो चलिए जान लेते हैं गिलोय के नुकसान (Side effect of Giloy in Hindi) क्या – क्या हैं |

1.गर्भावस्था में गिलोय के नुकसान 

गर्भावस्था में अथवा गर्भवती महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिये, और जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं उन्हें भी इसके सेवन में परहेज करना चाहिये | इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें |

2. डायबिटीज में गिलोय के नुकसान

जिन्हें भी डायबिटीज की समस्या है अर्थात जो लो (low) डायबिटीज के मरीज हैं उन्हें गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिये |

3. बहुत छोटे बच्चों अथवा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिये उन्हें इसका सेवन न करने दें |

4. यदि किसी ने सर्जरी करवाई है तो उन्हें गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिये, क्योकि इसकी तासीर गरम होने के कारण यह ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकती है|

यहाँ वैक्सीन क्या है और कैसे काम करती है पढ़ें।

गिलोय के फायदे और नुकसान से सम्बंधित सामान्य प्रश्न

Que : गिलोय के नुकसान क्या हैं?

Ans : वैसे तो गिलोय के सेवन से कोई ज्यादा नुकसान नहीं है | लेकिन ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करना नुकसानदायक भी हो सकता है | गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं इसके सेवन से परहेज करे और सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें |

Que : गिलोय को किस बर्तन में रखकर पियें?

Ans : आप गिलोय को कांच या स्टील की गिलास में पी सकते हैं |

Que : क्या टाइफाइड में गिलोय पी सकते हैं?

Ans : हाँ, आप टाइफाइड में भी गिलोय का सेवन कर सकते हैं |

Que : लगातार गिलोय को कितने दिनों तक पियें?

Ans : वैसे तो गिलोय के सेवन से नुकसान नहीं होते हैं, लेकिन अच्छा होगा की इसे आप औषधीय के रूप में पियें | आप इसे 2-3 महीने सेवन करने के बाद कुछ दिनों तक इसका सेवन रोक दें |

Que : किस उम्र के लोग गिलोय के सेवन करें?

Ans : 5 साल से ऊपर किसी भी उम्र के लोग इसका सेवन कर सकते हैं |

Que : गिलोय कहाँ पाया जाता है?

Ans :हालाँकि, गिलोय भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है , यह बगीचों में पेड़ों में लिपटा होता है | इसके अलावा इसे जंगलों और पहाड़ों में भी देखा जा सकता है |

दोस्तों हमें उम्मीद है, कि गिलोय के फायदे और नुकसान (Giloy Benefits and Side Effects in Hindi) पर आधारित यह लेख आपके लिए जानकारीपूर्ण रहा होगा। यदि आपको गिलोय के फायदे और नुकसान लेख से सम्बंधित कोई प्रश्न हैं तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं साथ ही आप हमारे साथ जुड़े रहें और अन्य हेल्थ सम्बंधित लेखों को भी पढ़ें।

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यूनिट मेम्ब्रेन कांसेप्ट या इकाई यूनिट झिलणी – Useful Notes on Unit Membrane Concept!



रॉबर्टसन के अनुसार, इकाई झिल्ली में एक द्विआण्विक लिपिड पत्रक होता है जो प्लीटेड शीट विन्यास में व्यवस्थित प्रोटीन की बाहरी और आंतरिक परतों के बीच सैंडविच होता है। इस तरह की व्यवस्था को मूल रूप से सभी कोशिका झिल्लियों में समान माना जाता था। 1950 के दशक के उत्तरार्ध में, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ने प्लाज्मा झिल्ली की संरचना के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्रदान की। यूनिट मेम्ब्रेन कांसेप्ट या इकाई यूनिट झिलणी के बारे में सभी आवश्यक विवरण यहाँ जानें।

यूनिट मेम्ब्रेन कांसेप्ट या इकाई यूनिट झिलणी

जे डी रॉबर्टसन इस क्षेत्र में अग्रणी थे, यह दिखाते हुए कि ऑस्मियम टेट्रोक्साइड के साथ तय की गई झिल्ली ने दो समानांतर बाहरी अंधेरे (ऑस्मोफिलिक) परतों और एक केंद्रीय प्रकाश (ऑस्मियोफोबिक) परत (छवि 15-6) से मिलकर एक विशेषता त्रि-लामिना उपस्थिति प्रकट की।

ऑस्मियोफिलिक परतों को आमतौर पर मोटाई में 20-25 Å (2.0-2.5nm)) मापा जाता है और ऑस्मियोफिलिक परतों की माप 25-35 Å (2.5-3.5 nm) होती है, जो 65-85 Å (6.5-8.5 nm) की कुल मोटाई प्रदान करती है। यह मान रासायनिक अध्ययनों के आधार पर अनुमानित मोटाई के अनुकूल तुलना में है।

रॉबर्टसन और अन्य ने प्रदर्शित किया कि त्रि-लामिना पैटर्न एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम सहित कई अन्य सेलुलर झिल्ली की विशेषता थी। अध्ययन की गई कोशिका झिल्लियों की उपस्थिति में अंतर्निहित एकता को देखते हुए, रॉबर्टसन ने अपने अब तक के प्रसिद्ध इकाई झिल्ली मॉडल का प्रस्ताव रखा। रॉबर्टसन के अनुसार, इकाई झिल्ली में एक द्विआण्विक लिपिड पत्रक होता है जो प्लीटेड शीट विन्यास में व्यवस्थित प्रोटीन की बाहरी और आंतरिक परतों के बीच सैंडविच आकर का होता है। इस तरह की व्यवस्था को मूल रूप से सभी कोशिका झिल्लियों में समान माना जाता था।

हालांकि रॉबर्टसन ने झिल्ली के बीच विशिष्ट रासायनिक अंतर को स्वीकार किया (यानी, विशेष आणविक प्रजातियां जो प्रत्येक झिल्ली को अलग करती हैं), उन्होंने प्रस्तावित किया कि आणविक संगठन का पैटर्न मूल रूप से समान था। यद्यपि लगभग सभी झिल्लियों के समान इलेक्ट्रॉन-सूक्ष्म रूप के बारे में कोई संदेह नहीं हो सकता है, इसलिए एकरूपता के लिए एक सख्त रासायनिक व्याख्या अब समर्थित नहीं है।

रॉबर्टसन ने इस धारणा को शामिल करने के लिए अपने यूनिट मेम्ब्रेन मॉडल का विस्तार किया कि एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम के माध्यम से परमाणु लिफाफा और प्लाज्मा झिल्ली के झिल्ली के बीच निरंतरता मौजूद है। कई अलग-अलग कोशिकाओं और ऊतकों के इलेक्ट्रॉन-सूक्ष्म अध्ययनों में इस तरह की निरंतरता की घटना की पुष्टि की गई है।

इसके अलावा, रॉबर्टसन ने सुझाव दिया कि वेसिकुलर ऑर्गेनेल इस निरंतर झिल्ली प्रणाली से उत्पन्न हो सकते हैं और बाद में उन्हें अलग-अलग संरचनाएं बनाने के लिए बंद कर दिया जाता है। लाइसोसोम और सूक्ष्म निकायों के मामले में इस धारणा के समर्थन में कुछ सबूत हैं।

ऑटोसोमल असामान्यताएं क्या हैं ?

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ऑटोसोमल असामान्यताएं क्या हैं ? – What is Autosomal Abnormalities Details in Hindi!



अधिकांश मानव गुणसूत्र असामान्यताएं ऑटोसोम में होती हैं। इनमें से अधिकतर असामान्यताएं मोनोसोमी या ट्राइसॉमी हैं। ऑटोसोमल मोनोसोमी वाले सभी भ्रूण गर्भावस्था की शुरुआत में अनायास ही समाप्त हो जाते हैं। इसी तरह, ऑटोसोमल ट्राइसॉमी वाले लगभग सभी भ्रूण जन्म से पहले ही मर जाते हैं। जो जीवित रहते हैं उनमें आमतौर पर कई शारीरिक विकृतियां, मानसिक मंदता और अपेक्षाकृत कम जीवन होता है। आगे बढ़ें और ऑटोसोमल असामान्यताएं के बारे में सभी आवश्यक विवरण पढ़ें।

ऑटोसोमल असामान्यताएं क्या हैं ?

सबसे प्रसिद्ध और सबसे आम ऑटोसोमल असामान्यता डाउन सिंड्रोम है। यह विशिष्ट शारीरिक लक्षणों के साथ मानसिक मंदता का एक हल्का से गंभीर रूप है। डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में ऑटोसोम जोड़ी 21 के साथ अनियमितता होती है। ज्यादातर मामलों में, एक अतिरिक्त गुणसूत्र होता है (यानी, ट्राइसॉमी 21)। इस गुणसूत्र में एक संरचनात्मक संशोधन होता है। विशेष रूप से, गुणसूत्र 21 के सभी या उसके भाग का गुणसूत्र 14 या 15 में स्थानान्तरण होता है। गुणसूत्र 21 पर वास्तविक जीन जो डाउन सिंड्रोम के लिए जिम्मेदार हैं, अब उनकी पहचान की जा रही है। ऐसा माना जाता है कि इसमें कम से कम 350 जीन शामिल हैं। डाउन सिंड्रोम वाले लगभग 2-4% लोग आनुवंशिक रूप से मोज़ेक होते हैं। यही है, उनकी कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्र 21 ट्राइसॉमी होते हैं जबकि अन्य में नहीं होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आम तौर पर हल्के लक्षण होते हैं। डाउन सिंड्रोम के ट्रांसलोकेशनल प्रकार में भी आमतौर पर कम गंभीर लक्षण होते हैं।

डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में आमतौर पर मोटे हाथों और पैरों के साथ छोटे, स्टॉकी शरीर होते हैं। उनके हाथों में भी आमतौर पर “सिमियन क्रीज” होती है, जो हथेली में एक क्रीज होती है जो हाथ के एक तरफ से दूसरी तरफ पूरी तरह से चलती है। इसके अलावा, उनके पास आम तौर पर छोटे कम-सेट कानों के साथ चौड़े, छोटे सिर होते हैं, छोटे अवतल काठी के आकार या चपटी नाक, अपेक्षाकृत बड़ी उभरी हुई जीभ होती है जो एक उभरे हुए निचले होंठ, ढीले जोड़ों और कम मांसपेशी टोन पर होती है। अक्सर, उनकी आंखों में एक पूर्व एशियाई जैसी उपस्थिति होती है, जो कि एक एपिकैंथिक फोल्ड के कारण होता है। यह प्रत्येक पलक के भीतरी कोने पर त्वचा की एक तह होती है, जिससे आंखें ऊपर की ओर तिरछी दिखाई देती हैं। इस आंख की विशेषता के कारण, डाउन सिंड्रोम को मंगोलोइडिज्म के रूप में संदर्भित किया गया था। जब इसे पहली बार 1866 में अंग्रेजी चिकित्सक जॉन लैंगडन डाउन द्वारा वर्णित किया गया था। हालाँकि, यह शब्द भ्रामक था क्योंकि डाउन सिंड्रोम किसी भी मानव समूह में हो सकता है, न कि केवल एशियाई लोगों में। नतीजतन, मंगोलोइडिज्म को डाउन सिंड्रोम के पर्याय के रूप में खारिज कर दिया गया है। 1959 तक यह पता नहीं चला था कि डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियों में गुणसूत्रों की संख्या अनियमित होती है।

डाउन सिंड्रोम वाले लोगों को अक्सर अन्य चिकित्सीय समस्याएं होती हैं। इनमें मिर्गी शामिल है। हालांकि, इन चिकित्सा समस्याओं की संवेदनशीलता के संबंध में डाउन सिंड्रोम आबादी के भीतर काफी परिवर्तनशीलता है। यह संभावना है कि डाउन सिंड्रोम की विशेषता असामान्य लक्षण कम से कम आंशिक रूप से शामिल जीन की अधिक अभिव्यक्ति का परिणाम है। यह अति अभिव्यक्ति एक अतिरिक्त गुणसूत्र 21 की उपस्थिति का परिणाम है। अति अभिव्यक्ति का एक लाभ डीएससीआर 1 जीन द्वारा कोडित प्रोटीन उत्पादन में वृद्धि है। इसके परिणामस्वरूप डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में बृहदान्त्र, स्तन और अन्य ठोस ट्यूमर कैंसर की दर काफी कम हो जाती है।

डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति त्वरित दर से उम्र के प्रतीत होते हैं। 35 वर्ष की आयु तक, गैर-मोज़ेक डाउन सिंड्रोम वाले कम से कम 25% लोगों ने अल्जाइमर सिंड्रोम विकसित करना शुरू कर दिया है। एक सदी पहले यह समस्या नहीं थी क्योंकि डाउन सिंड्रोम वाले ज्यादातर लोगों की बचपन में ही मृत्यु हो जाती थी। 1929 में संयुक्त राज्य अमेरिका में डाउन सिंड्रोम वाले एक बच्चे की जीवन प्रत्याशा केवल 9 वर्ष थी। दुर्भाग्य से, अपर्याप्त चिकित्सा देखभाल वाले गरीब देशों में ऐसा नहीं है। डाउन सिंड्रोम वाले दक्षिण अमेरिकी बच्चों में से लगभग 55% बच्चे अपने जीवन के पहले वर्ष में ही मर जाते हैं।

डाउन सिंड्रोम वाले लोगों का सबसे प्रमुख और दुर्बल करने वाला लक्षण मानसिक मंदता है। वे आमतौर पर केवल 3-7 साल के सामान्य बच्चे के मानसिक आयु स्तर तक पहुंचते हैं। वे धीमी गति से सीखने वाले होते हैं और उनका अमूर्त तर्क विशेष रूप से सीमित होता है। हालांकि, डाउन सिंड्रोम वाले कुछ उच्च उपलब्धि वाले व्यक्तियों में 12 वर्ष के मानसिक स्तर होते हैं, जो कि समाज में कम सहायता के साथ कार्य करने के लिए पर्याप्त है। डाउन सिंड्रोम वाले लोग आमतौर पर सौम्य, भरोसेमंद व्यक्तित्व वाले होते हैं और बहुत हॉट और प्यार करने वाले होते हैं। परिवार के सदस्य और मित्र अक्सर उन्हें हर्षित, निर्जन, मैत्रीपूर्ण व्यक्तित्व वाले के रूप में संदर्भित करते हैं।

डाउन सिंड्रोम के अधिकांश भ्रूण जन्म तक जीवित रहने के लिए पर्याप्त रूप से व्यवहार्य नहीं होते हैं – उनमें से लगभग 85% अनायास गर्भपात हो जाते हैं। यह संभावना है कि सभी गर्भपात में से 1/4 डाउन सिंड्रोम के ट्राइसॉमी रूप के कारण होते हैं। हालांकि, यू.एस. में डाउन सिंड्रोम वाले लगभग 400,000 लोग जन्म से बच गए हैं और आज भी जीवित हैं। जबकि यह एक बड़ी संख्या है, यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि सभी मानसिक रूप से मंद लोगों को डाउन सिंड्रोम नहीं होता है।

डाउन सिंड्रोम की समग्र घटना 800 जीवित जन्मों में से केवल 1 में होती है। हालांकि, गर्भाधान होने पर मां की उम्र के साथ दर काफी भिन्न होती है। जिन महिलाओं की उम्र 20 वर्ष है, उनमें डाउन सिंड्रोम वाला बच्चा होने की संभावना सबसे कम (2000 में 1) होती है। महिलाएं 800 में से 1 की औसत जोखिम दर तक नहीं पहुंचती हैं जब तक कि वे लगभग 30 वर्ष की नहीं हो जातीं। नतीजतन, 35 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए नियमित रूप से एमनियोसेंटेसिस की सिफारिश की जाती है। युवा महिलाओं के लिए नियमित रूप से इसकी अनुशंसा नहीं की जाती है क्योंकि नैदानिक ​​लाभ गर्भपात के जोखिम से अधिक नहीं होते हैं।

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लॉ ऑफ मिनिमम का उदाहरण बताइये – Law of Minimum Details in Hindi!



लीबिग का न्यूनतम कानून (law of minimum in Hindi), जिसे अक्सर लिबिग का कानून या लॉ ऑफ मिनिमम कहा जाता है, कार्ल स्प्रेंगेल (1840) द्वारा कृषि विज्ञान में विकसित एक सिद्धांत है और बाद में जस्टस वॉन लिबिग द्वारा लोकप्रिय किया गया। इसमें कहा गया है कि विकास कुल उपलब्ध संसाधनों से नहीं, बल्कि सबसे दुर्लभ संसाधन (सीमित कारक) से निर्धारित होता है। सूरज की रोशनी या खनिज पोषक तत्वों जैसे कारकों के लिए जैविक आबादी और पारिस्थितिकी तंत्र मॉडल पर भी कानून लागू किया गया है।

यह मूल रूप से पौधे या फसल के विकास के लिए लागू किया गया था, जहां यह पाया गया कि प्रचुर मात्रा में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ने से पौधे में वृद्धि नहीं हुई। केवल सीमित पोषक तत्व (“ज़रूरत” के संबंध में सबसे दुर्लभ) की मात्रा में वृद्धि से ही एक पौधे या फसल की वृद्धि में सुधार हुआ था। इस सिद्धांत को सूत्र में अभिव्यक्त किया जा सकता है, “मिट्टी में सबसे प्रचुर पोषक तत्व की उपलब्धता उतनी ही अच्छी है जितनी मिट्टी में कम से कम प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व की उपलब्धता।” या, इसे और अधिक स्पष्ट रूप से कहने के लिए, “एक श्रृंखला उतनी ही मजबूत होती है जितनी उसकी सबसे कमजोर कड़ी होती है।” हालांकि फसल की पैदावार को सीमित करने वाले कारकों का निदान एक सामान्य अध्ययन है, इस दृष्टिकोण की आलोचना की गई है।

लॉ ऑफ मिनिमम का वैज्ञानिक अनुप्रयोग

लाइबिग का न्यूनतम कानून नियम जैविक आबादी तक बढ़ा दिया गया है (और आमतौर पर पारिस्थितिकी तंत्र मॉडलिंग में उपयोग किया जाता है)। उदाहरण के लिए, एक जीव की वृद्धि जैसे कि एक पौधे कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर हो सकता है, जैसे कि सूरज की रोशनी या खनिज पोषक तत्व (जैसे, नाइट्रेट या फॉस्फेट)। इनकी उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है, जैसे कि किसी भी समय एक दूसरे की तुलना में अधिक सीमित होता है। लिबिग का नियम कहता है कि विकास केवल सबसे सीमित कारक द्वारा अनुमत दर पर होता है।

उदाहरण के लिए, नीचे दिए गए समीकरण में, जनसंख्या की वृद्धि O कम से कम तीन माइकलिस-मेंटेन शब्दों का एक फलन है जो कारकों द्वारा सीमा का प्रतिनिधित्व N-P-K करता है।

Law Of Minimum

समीकरण का उपयोग उस स्थिति तक सीमित है जहां स्थिर अवस्था ceteris paribus स्थितियां होती हैं, और कारक अंतःक्रियाओं को नियंत्रित किया जाता है।

प्रोटीन पोषण

मानव पोषण में, न्यूनतम के नियम का उपयोग विलियम कमिंग रोज द्वारा आवश्यक अमीनो एसिड को निर्धारित करने के लिए किया गया था। 1931 में उन्होंने अपना अध्ययन “अत्यधिक परिष्कृत अमीनो एसिड के मिश्रण के साथ” प्रकाशित किया।आवश्यक अमीनो एसिड के ज्ञान ने शाकाहारियों को विभिन्न वनस्पति स्रोतों से प्रोटीन के संयोजन से अपने प्रोटीन पोषण को बढ़ाने में सक्षम बनाया है। फ्रांसिस मूर लाप्पे ने 1971 में डाइट फॉर ए स्मॉल प्लैनेट प्रकाशित किया जिसने अनाज, फलियां और डेयरी उत्पादों का उपयोग करके प्रोटीन संयोजन को लोकप्रिय बनाया।

अन्य अनुप्रयोग

हाल ही में लिबिग का कानून प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में एक एप्लीकेशन खोजना शुरू कर रहा है जहां यह अनुमान लगाता है कि प्राकृतिक संसाधन इनपुट पर निर्भर बाजारों में विकास सबसे सीमित इनपुट द्वारा प्रतिबंधित है। चूंकि प्राकृतिक पूंजी जिस पर विकास निर्भर करता है, ग्रह की सीमित प्रकृति के कारण आपूर्ति में सीमित है, लिबिग का कानून संसाधनों की खपत के लिए बहु-पीढ़ी के दृष्टिकोण की अनुमति देने के लिए वैज्ञानिकों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधकों को आवश्यक संसाधनों की कमी की गणना करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

नियोक्लासिकल आर्थिक सिद्धांत ने प्रतिस्थापन और तकनीकी नवाचार के कानून के नियम द्वारा संसाधन की कमी के मुद्दे का खंडन करने की मांग की है। प्रतिस्थापन योग्यता “कानून” में कहा गया है कि जैसे ही एक संसाधन समाप्त हो जाता है – और अधिशेष की कमी के कारण कीमतें बढ़ती हैं – वैकल्पिक संसाधनों पर आधारित नए बाजार मांग को पूरा करने के लिए कुछ कीमतों पर दिखाई देते हैं। तकनीकी नवाचार का तात्पर्य है कि मानव उन परिस्थितियों में अंतराल को भरने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में सक्षम हैं जहां संसाधन अपूर्ण रूप से प्रतिस्थापन योग्य हैं।

बाजार आधारित सिद्धांत उचित मूल्य निर्धारण पर निर्भर करता है। जहां स्वच्छ हवा और पानी जैसे संसाधनों का हिसाब नहीं है, वहां “बाजार की विफलता” होगी। इन विफलताओं को पिगोवियन करों और कार्बन टैक्स जैसे सब्सिडी के साथ संबोधित किया जा सकता है।

जहां कोई विकल्प मौजूद नहीं है, जैसे फॉस्फोरस, रीसाइक्लिंग आवश्यक होगा। इसके लिए सावधानीपूर्वक दीर्घकालिक योजना और सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।

जैव प्रौद्योगिकी में लॉ ऑफ मिनिमम

तकनीकी नवाचार का एक उदाहरण पादप आनुवंशिकी में है जिसके द्वारा प्रजातियों की जैविक विशेषताओं को सबसे सीमित संसाधन पर जैविक निर्भरता को बदलने के लिए आनुवंशिक संशोधन को नियोजित करके बदला जा सकता है। इस प्रकार जैव-प्रौद्योगिकीय नवाचार प्रजातियों में वृद्धि की सीमा को एक वृद्धि से बढ़ाने में सक्षम हैं जब तक कि एक नया सीमित कारक स्थापित नहीं हो जाता है, जिसे तब तकनीकी नवाचार के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।

सैद्धांतिक रूप से अज्ञात उत्पादकता सीमा की ओर संभावित वृद्धि की संख्या की कोई सीमा नहीं है। यह या तो वह बिंदु होगा जहां उन्नत की जाने वाली वृद्धि इतनी कम है कि इसे आर्थिक रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता है या जहां प्रौद्योगिकी एक अभेद्य प्राकृतिक बाधा से मिलती है। यह जोड़ने योग्य हो सकता है कि जैव प्रौद्योगिकी स्वयं पूरी तरह से प्राकृतिक पूंजी के बाहरी स्रोतों पर निर्भर है।

ऑटोसोमल असामान्यताएं क्या हैं ?

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विटामिन और उनके स्रोत की सूची – यहाँ जानें क्या-क्या खाने से होगी इम्युनिटी मजबूत!



हम आमतौर पर विटामिन के बारे (About Vitamins in Hindi) में बात करते हैं लेकिन क्या हम जानते हैं कि विटामिन क्या हैं (What is Vitamins in Hindi) और विटामिन के विभिन्न स्त्रोत कौन कौन से हैं ? विटामिन महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे शरीर में विभिन्न कार्य करते हैं। विटामिन की कमी भोजन के रूप में हो सकती है जिसका आप सेवन करते हैं, इसमें विटामिन की पर्याप्त मात्रा नहीं हो सकती है और शरीर में विटामिन की कमी हो सकती है। विटामिन की यह कमी शरीर के समुचित कार्य को बाधित करती है। विटामिन से समृद्ध संतुलित आहार लेने के लिए हमें विटामिन, विटामिन के महत्व और विटामिन के स्रोतों के बारे में जानना होगा। विभिन्न विटामिन और उनके स्रोत (List of vitamins and their sources in Hindi) और विटामिन के महत्व के बारे में जानने के लिए इस लेख को पढ़ें। ये भी पढ़ें – कोरोना वायरस के घरेलू एवं मेडिकल उपचार

विटामिन और उनके स्रोत | Vitamins and Their Sources

13 आवश्यक विटामिन हैं जो मानव शरीर के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये विटामिन दो श्रेणियों में विभाजित हैं, वसा में घुलनशील और पानी में घुलनशील विटामिन। तालिका में नीचे दिए गए विभिन्न विटामिन और उनके स्रोत (List of vitamins and their sources Hindi Me) हैं। ये भी पढ़ें – हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान

वसा में घुलनशील विटामिन पानी में घुलनशील विटामिन
इसे शरीर के वसायुक्त ऊतक में संग्रहित किया जाता है। यह शरीर में जमा नहीं होता है।
वसा में घुलनशील विटामिन – A,D,E, K पानी में घुलनशील विटामिन – B1, B2, B3, B5, B6, B7, B9, B12, C




विटामिन और उनके स्रोत की सूची | List of vitamins and their sources in Hindi

वसा में घुलनशील विटामिन क्या हैं | What are fat soluble vitamins in Hindi

वसा में घुलनशील विटामिन तेल के समान होते हैं और पानी में नहीं घुलते हैं। वसा में घुलनशील विटामिन उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थों में सबसे प्रचुर मात्रा में होते हैं और जब आप उन्हें वसा के साथ खाते हैं तो आपके रक्तप्रवाह में बहुत बेहतर अवशोषित होते हैं। नीचे दी गई तालिका विभिन्न विटामिनों की सूची और उनके स्रोत हैं साथ ही इसमें देख सकते हैं की ये विटामिन किन किन चीजों को खाने से मिलते हैं। ये भी पढ़ें – वैक्सीन क्या है और कैसे काम करती है 
विटामिन विटामिन क्यों आवश्यक है विटामिन सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है
विटामिन A
  • यह विटामिन दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह विटामिन स्वस्थ त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली प्रदान करता है।
  • यह हड्डी और दांत के विकास में भी सुधार करता है।
  • यह प्रतिरक्षा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पाश्चराइज्ड दूध
  • पनीर
  • मलाई
  • मक्खन
  • दृढ़ मार्जरीन
  • अंडे
  • जिगर
  • पत्तीदार शाक भाजी
  • खुबानी
  • गाजर
  • मीठे आलू
  • कद्दू।
विटामिन D
  • यह हड्डियों में जमा कैल्शियम के उचित अवशोषण में आवश्यक है।
  • अंडे
  • जिगर
  • फैटी मछली
  • पाश्चराइज्ड दूध
  • फोर्टिफाइड मार्जरीन
  • सूरज की रोशनी।
विटामिन E
  • यह सेल की दीवारों की सुरक्षा करता है।
  • सोयाबीन, मक्का
  • पत्तेदार हरी सब्जियां
  • गेहूं के कीटाणु
  • साबुत अनाज उत्पादों
  • जिगर
  • अंडे
  • दाने और बीज।
विटामिन K
  • यह उचित रक्त के थक्के के लिए आवश्यक है।
  • गोभी
  • हरा कोलार्ड
  • पालक
  • ब्रोकली
  • ब्रसल स्प्राउट
  • एस्परैगस
  • बैक्टीरिया द्वारा आंत्र पथ में उत्पादित।




जल में घुलनशील विटामिन क्या हैं | What are water soluble vitamins in Hindi

पानी में घुलनशील विटामिन ऐसे विटामिन हैं जो पानी में घुल सकते हैं। इन विटामिनों को शरीर के ऊतकों में ले जाया जाता है लेकिन ये शरीर में जमा नहीं होते हैं। वे पशु खाद्य पदार्थों और पौधों या आहार पूरक में पाए जाते हैं और उन्हें दैनिक रूप से लिया जाना चाहिए। विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के सदस्य पानी में घुलनशील हैं। जल-घुलनशील विटामिन और उनके स्रोतों के बारे में अधिक जानने के लिए, नीचे दी गई तालिका देखें। ये भी पढ़ें – वजन घटाने के घरेलू उपाय

विटामिन विटामिन क्यों आवश्यक है विटामिन सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है
थियामिन (विटामिन बी 1)
  • एक एंजाइम का हिस्सा जो ऊर्जा चयापचय के लिए आवश्यक है।
  • यह तंत्रिका कामकाज में महत्वपूर्ण है।
  • पोर्क
  • साबुत अनाज
  • समृद्ध ब्रेड
  • अनाज
  • फलियां
  • दाने और बीज।
  • यह मध्यम मात्रा में सभी पौष्टिक भोजन में पाया जाता है।
राइबोफ्लेविन (विटामिन बी 2)
  • ऊर्जा चयापचय के लिए एक एंजाइम के भाग की आवश्यकता होती है।
  • यह सामान्य दृष्टि और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
  • दूध और दूध से बने पदार्थ
  • पत्तेदार हरी सब्जियां
  • साबुत अनाज
  • समृद्ध ब्रेड
  • अनाज।
नियासिन (विटामिन बी 3) यह विटामिन निम्न बनाए रखने में मदद करता है:

  • स्वस्थ त्वचा
  • तंत्रिकाओं
  • पाचन तंत्र।
  • मांस
  • मछली
  • साबुत अनाज
  • समृद्ध ब्रेड
  • अनाज
  • मशरूम
  • पत्तेदार हरी सब्जियां
  • मूंगफली का मक्खन।
पैंथोथेटिक अम्ल
  • यह विटामिन भोजन के चयापचय के लिए आवश्यक है।
  • यह लगभग सभी भोजन में व्यापक है।
बायोटिन
  • प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय में महत्वपूर्ण।
  • यह हार्मोन और कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन में भी मदद करता है।.
  • यह भोजन में व्यापक है।
  • यह बैक्टीरिया द्वारा आंत्र पथ में निर्मित होता है।.
पाइरिडोक्सिन (विटामिन बी 6)
  • प्रोटीन चयापचय के लिए आवश्यक एंजाइम का हिस्सा।
  • यह लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है।
  • मांस
  • मछली
  • मुर्गी
  • सब्जियां
  • फल।
फोलिक एसिड
  • डीएनए बनाने के लिए एक एंजाइम के भाग की आवश्यकता होती है।
  • यह नई कोशिकाओं यानी लाल रक्त कोशिकाओं के लिए भी आवश्यक है।
  • पत्तेदार हरी सब्जियां
  • फलियां
  • संतरे का रस
  • जिगर
  • यह अब सबसे परिष्कृत अनाज में जोड़ा जाता है।
कोबालमिन (विटामिन बी 12)
  • नई कोशिकाओं को बनाने के लिए आवश्यक एंजाइम का भाग।
  • यह तंत्रिका कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मांस
  • मुर्गी
  • मछली
  • समुद्री भोजन
  • अंडे
  • दूध और दूध से बने पदार्थ
  • यह पादप खाद्य पदार्थों में नहीं पाया जाता है।
एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी)
  • यह स्वस्थ दांतों और मसूड़ों को बढ़ावा देता है।
  • यह स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है।
  • प्रोटीन चयापचय के लिए एक एंजाइम के भाग की आवश्यकता होती है।
  • यह आयरन के अवशोषण में मदद करता है।
  • खट्टे फल
  • गोभी
  • खरबूजा
  • स्ट्रॉबेरीज
  • काली मिर्च
  • टमाटर
  • आलू
  • सलाद
  • पपीता
  • आम
  • कीवी फल।

आशा है कि विटामिन और उनके स्रोत पर यह लेख जानकारीपूर्ण और आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक था। यदि आपके पास लेख से संबंधित कोई प्रश्न हैं, तो टिप्पणी अनुभाग में उल्लेख करें। साथ ही आप ऐसे ही अन्य लेखों को पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करना न भूलें। ये भी पढ़ें – मेडिटेशन क्या है और मेडिटेशन करने के फायदे क्या-क्या हैं

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कोरोना वायरस के घरेलू एवं मेडिकल उपचार – Corona Virus के लिए डाइट प्लान यहाँ पढ़ें!



कोरोना वायरस ने आज दुनिया के लिए एक ऐसी भयानक महामारी का रूप ले लिया है, जिससे आज सभी लोग बेहद परेशान हैं। कोरोना वायरस के चलते न ही रोटी का ठिकाना हो पा रहा न ही इंसान पहले जैसा सुखी जीवन व्यतीत कर पा रहा है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन लोगों को बचाव करने का लगातार संदेश दे रहा है। कोरोना से बचने के लिए लोगों को सावधान होने की जरूरत है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोगो को खुद से सावधानी बरतनी होगी तभी इस भयानक बीमारी की चपेट से बचा जा सकते है कोरोना वायरस के घरेलू उपचार में घरेलु नुस्खों का बहुत सहारा है इसके लिए तुलसी, अदरख, गुड़, सोंठ, गोल मिर्च आदि का चाय के रूप में सेवन करना कोरोना वायरस के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित हो रहा है। कोरोना वायरस के घरेलू उपचार के रूप में इनके सेवन से पाचन शक्ति भी मजबूत होगी। साथ ही कोरोना वायरस से बचाव के लिए बार-बार हाथ को अच्छे तरीके से धोने के बाद ही मुंह व नाक को छूने का प्रयास करें। हाथ संक्रमित होने के कारण नाक, मुंह आदि छूने पर वायरस तेजी से फैलता है। कोरोना वायरस एक ऐसा वायरस है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानि एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से फैलता है। दुनियाभर में अब तक इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, पूरी दुनिया के इस बीमारी के संक्रमण को झेल रहे लोगों की संख्या भी लगातार वृद्धि हो रही है। हमें अपने साथ-साथ दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए की कैसे अपने आप को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाया जा सकता है। कभी भी बिना मास्क के घर से बाहर न निकालें। कोरोना वायरस की चपेट में वह लोग ज्यादा आ रहे हैं जो बुजुर्ग हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसलिए अपनी इम्युनिटी को बढ़ाकर और पर्याप्त साफ सफाई रख कर कोरोना वायरस संक्रमण को होने से रोका जा सकता है। यदि आप कोरोना वायरस के घरेलू उपचार एवं मेडिकल उपचार (Home Remedies and Medical Treatment of Corona Virus in Hindi) के बारे में खोज रहे हैं और कोरोना वायरस के लिए डाइट प्लान खोज रहे हैं, तो आप इस लेख के माध्यम आप कोरोना वायरस से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में जान सकते हैं। इन्हे भी पढ़ें – वजन घटाने के घरेलू उपाय

कोरोना वायरस क्या है? What is corona virus in Hindi

कोरोना वायरस का संबंध वायरस के एक ऐसे समूह से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ था। कोरोना वायरस, विषाणुओं के एक बहुत बड़े परिवार का हिस्सा है जो किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता। यह एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। नोवेल कोरोना वायरस यानी ये नया वायरस पहली बार सामने आया है जो इंसान को संक्रमित कर रहा है। WHO ने इस नए कोरोना वायरस को 2019-nCoV नाम दिया है।

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कोरोना वायरस कैसे फैलता है। How the corona virus spreads in Hindi

किसी भी स्वास्थ्य व्यक्ति को कोरोना उन लोगों से हो सकता है जिनमें इस वायरस का संक्रमण पहले से ही होता है। जब COVID-19 से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छीकता है या सांस छोड़ता है तो उसके नाक या मुंह से निकली छोटी बूंदों से यह रोग दूसरे में फैल सकता है। ये बेहद महीन बूंदें उस व्यक्ति के आस-पास की दूसरी चीजों और सतहों पर भी गिर सकती है। दूसरा व्यक्ति उस सामान या सतह के संपर्क में आने के बाद अपने मुंह, नाक या आंख को छूने से भी कोरोना से संक्रमित हो सकता है। लोग संक्रमित व्यक्ति के खांसने या सांस छोड़ने से निकली बूंदों को सांस के जरिए अंदर लेने से भी संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि बीमार व्यक्ति से 3-6 फीट या 1-2 मीटर दूर रहा जाए।

कोरोना वायरस के लक्षण। Symptoms of Corona Virus in Hindi

कोरोना वायरस के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं। संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। कुछ मामलों में कोरोना वायरस घातक भी हो सकता है, खास तौर पर अधिक उम्र के लोग और जिन्हें पहले से अस्थमा, डायबिटीज़ और हार्ट की बीमारी है उनके लिए कोरोना ने अब नया मोड़ ले लिया है। बेचैनी, पेट में दर्द, दस्त, कमजोरी यह सभी समस्याएं गर्मियों में किसी को भी हो सकती है, लेकिन अब अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि यह समस्याएं कोरोना के नए लक्षणों में शामिल हो चुकी हैं। कोरोना का विस्तार पहले से अब काफी व्यापक हो गया है देश भर में दिन-प्रतिदिन कोरोना के आंकड़ों में वृद्धि होती जा रही है इस बीमारी ने इतना खतरनाक मोड़ लिया है, जिसमे पीड़ितों की संख्या के साथ-साथ मरने वालो की भी तादात दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है। कोरोना के पुराने लक्षण निम्न हैं –

  • लगातार खांसी
  • गले में दर्द
  • स्मेल का पता न चलना
  • स्वाद का पता न चलना
  • लगातार बुखार आना
  • साँस लेने में तकलीफ



कोरोना वायरस के नए लक्षण । New symptoms of corona virus in Hindi

COVID -19 वाले लोगों में लक्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है जिनमे हल्के से लेखर गंभीर लक्षण होते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-14 दिन बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं। निम्न लक्षणों वाले लोगों में COVID-19 हो सकता है:

  • बुखार या ठंड लगना
  • सूखी खांसी
  • सांस की तकलीफ या सांस लेने में कठिनाई
  • थकान
  • मांसपेशियों या शरीर में दर्द
  • सरदर्द
  • स्वाद या गंध का पता न चलना
  • गले में खरास
  • बहती नाक
  • मतली या उलटी
  • दस्त

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कोरोना की आपातकालीन चिकित्सा कब लें

COVID-19 के लिए आपातकालीन चेतावनी संकेत देखें। यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिख रहा है, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें:

  • साँस लेने में तकलीफ़
  • छाती में लगातार दर्द या दबाव
  • जागने में असमर्थता
  • त्वचा की टोन के आधार पर हल्के भूरे, भूरे या नीले रंग की त्वचा, होंठ या नाखून के रंगों में परिवर्तन
  • यह सभी संभव लक्षण नहीं हैं। कृपया किसी अन्य लक्षण के लिए अपने चिकित्सा प्रदाता को कॉल करें।

कोरोनावायरस टेस्ट कैसे करायें?

यदि आपको लगता है कि आपके लक्षण कोरोनोवायरस के लिए विशिष्ट हैं, तो आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता परीक्षण के निर्देशों के लिए सीडीसी या स्थानीय स्वास्थ्य सेवा विभागों से संपर्क कर सकता है। कोरोनोवायरस परीक्षण करने के लिए विशिष्ट प्रयोगशालाएँ स्थापित हैं, इसलिए आपको इनमें से किसी एक प्रयोगशाला में निर्देशित किया जा सकता है।

विभिन्न प्रकार के कोरोनावायरस परीक्षण किए जा सकते हैं:

Swab Test – इस मामले में, आपकी नाक या गले से एक नमूना लेने के लिए एक विशेष ट्यूब का उपयोग किया जाता है।
Nasal aspirate – इस मामले में, एक ट्यूब को नाक में इंजेक्ट किया जाएगा और फिर, एक नमूना को हल्के से लिया जाता है।
Tracheal aspirate – इस मामले में, एक एक पतली ट्यूब, जिसे ब्रोंकोस्कोप के रूप में भी जाना जाता है, आपके फेफड़ों तक पहुंचने के लिए आपके मुंह में डाल दी जाती है, जहां से एक नमूना एकत्र किया जाता है।
Sputum Test – स्पुतम गाढ़ा बलगम होता है जो फेफड़ों में जमा हो जाता है और खांसी के साथ बाहर आता है। इस परीक्षण के दौरान, आपको एक विशेष कप में थूक को रखने की आवश्यकता होती है या आपकी नाक से नमूना लेने के लिए स्वास का उपयोग किया जाता है।
Blood Test – इस मामले में, हाथ में एक नस से रक्त का नमूना लिया जाता है।

क्या होगा अगर कोरोनोवायरस टेस्ट पॉजिटिव आता है?

यदि आपके परीक्षण के परिणाम सकारात्मक आते हैं, तो आप कोरोनावायरस से प्रभावित हो सकते हैं। यद्यपि कोरोनोवायरस संक्रमण के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं हैं, हालांकि, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर कुछ कदम सुझा सकते हैं जो आपको लक्षणों से राहत देने में मदद करेंगे।

लक्षणों को कम करने के लिए आप कुछ चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • बहुत सारे तरल पदार्थ पीना
  • खूब आराम करना
  • ओवर-द-काउंटर दवाएं लेना

यदि आपकी स्थिति खराब हो जाती है या आपमें निमोनिया के लक्षण दिखते हैं, तो आपको अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। निमोनिया के कुछ सामान्य लक्षण हैं गंभीर खांसी, सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार।

यदि आपको कोरोनावायरस का पता चला है, तो आपको संक्रमण के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए निम्न चरणों का पालन करना चाहिए:

  • चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए घर से बाहर न निकलें।
  • हमेशा सार्वजनिक स्थानों पर या जब आप अन्य लोगों के आसपास होते हैं तो एक फेस मास्क पहनें।
  • किसी भी व्यक्तिगत वस्तुओं जैसे पीने के कप, खाने की प्लेट, तौलिए, या किसी भी अन्य वस्तुओं को किसी के साथ साझा न करें।
  • लगभग 20 सेकंड के लिए हमेशा अपने हाथ को अच्छी तरह से धोएं। यदि साबुन का पानी उपलब्ध नहीं है, तो आप अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें कम से कम 60% अल्कोहल होता है।
  • यदि आपके परिणाम नकारात्मक हो गए हैं, तो आप स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर के साथ जांच कर सकते हैं कि क्या किसी और परीक्षण की आवश्यकता है। किसी भी संक्रमण को रोकने के लिए सावधानी बरतना बेहतर है।

दूसरी ओर, आप नीचे दिए गए चरणों का पालन करके कोरोनावायरस से संक्रमित होने से बच सकते हैं:

  • 20 सेकंड के लिए अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं और साबुन-पानी की अनुपस्थिति में शराब-आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग करें
  • अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूने से बचें
  • यदि संभव हो, तो छींकने या खांसने वाले लोगों के करीब होने से बचें
  • घरेलू सामानों को साफ करें।

कोरोना वायरस के घरेलू उपचार

कई घरेलू उपचार COVID-19 के लक्षणों और संक्रमण को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं। ये उपचार बीमारी को ठीक नहीं करते हैं, लेकिन ये व्यक्ति को अधिक आरामदायक बना सकते हैं।

एक हैल्थकेयर प्रोफेशनल किसी व्यक्ति को अपने लक्षणों का इलाज करने के लिए निम्न तरीके के बारे में सलाह दे सकता है।

  • खूब आराम करना
  • शेष हाइड्रेटेड
  • एसिटामिनोफेन जैसे ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं लेना

बुखार और दर्द
व्यक्ति एसिटामिनोफेन और नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं, जैसे इबुप्रोफेन ले सकते है, क्योंकि वे बुखार से राहत देने और मांसपेशियों में दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्जलीकरण को रोकने में मदद करने के लिए वे बहुत सारे तरल पदार्थ पीते रहें।

प्रारंभ में, कुछ लोगों को चिंता थी कि इबुप्रोफेन COVID -19 में नुकसान कर सकती है। हालाँकि, इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक साक्ष्य स्रोत नहीं है।

खांसी
खांसी वायुमार्ग को साफ करने की कोशिश करने का शरीर का तरीका है। यूनाइटेड किंगडम की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की सलाह है कि खांसी वाले लोग अपनी पीठ के बल लेटने से बचें। इसके बजाय, उन्हें पेट तरफ से उठना या लेटना चाहिए।

खांसी को कम करने में मदद करने के लिए, आप निम्नलिखित कोरोना वायरस के घरेलू उपचार कर सकते हैं:

  • गले को शांत करने, निर्जलीकरण को रोकने और बलगम को पतला करने के लिए बहुत सारा पानी या गर्म पेय पीना
  • रात में हल्दी वाले दूध का उपयोग
  • काढ़ा बनाके पीना
  • कुछ लोगों को भाप में सांस लेने से भी राहत मिल सकती है। ऐसा करने के लिए, वे गर्म स्नान के साथ शॉवर में या बाथरूम के फर्श पर बैठकर भाप ले सकते हैं।

सांस लेने में कठिनाई
कोरोना वायरस पीड़ित व्यक्ति ध्यान दें कि सांस लेने में तकलीफ अधिक गंभीर SARS-CoV-2 संक्रमण का संकेत हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को सांस फूल रही है, तो उन्हें शांत रहने की कोशिश करनी चाहिए। सांस की तकलीफ एक ऐसा लक्षण है जो भयावह हो सकता है, लेकिन घबराहट से हाइपवेंटिलेशन हो सकता है, जो इसे बदतर बना सकता है। सांस की तकलीफ का अनुभव करने वाले लोगों को अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखना चाहिए।

आप कोरोना वायरस के घरेलू उपचार (Home Remedies of Corona Virus Hindi Me) के रूप में निम्नलिखित सुझाव भी ले सकते हैं:

  • धीरे-धीरे नाक के माध्यम से और मुंह के माध्यम से साँस छोड़ते हुए, होंठों को एक साथ बंद रखें
  • एक लंबी, सीधी रीढ़ वाली कुर्सी पर बैठे
  • कंधों को आराम देने और ऊपरी पीठ को गोल करने से बचें
  • थोड़ा आगे झुकें और हाथों को घुटनों पर सहारा देने के लिए रखें
  • कुछ रिसर्च बताते हैं कि पेट के बल लेटने से लोगों को अधिक ऑक्सीजन मिल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर के बल बैठने से दिल और पेट को फेफड़ों से नीचे दबाने से रोका जा सकता है।

कोरोना वायरस के घरेलू उपचार 

कोरोना वायरस के घरेलू उपचार के लिए हाइड्रेशन

डॉ रेखा का सुझाव है कि सूखी अदरक और तुलसी के पत्तों के साथ गर्म पानी को पीएं। इस काढ़े को बनाने के लिए, सूखे अदरक के टुकड़े के साथ थोड़ा पानी को तब तक उबाले जब तक कि इसकी मात्रा आधी न हो जाए। तुलसी के कुछ पत्ते डालें और इसे दिन में कई बार पियें।

कोरोना वायरस के घरेलू उपचार में खाएं भरपूर खाना

ताजा पकाया हुआ और गर्म भोजन करें। अपने लंच और डिनर में बिना किसी नमक या तेल के राइस ग्रेल या मूंग दाल सूप को ज़रूर शामिल करें। अधिक भोजन न करें, वास्तव में, प्रत्येक भोजन के बाद पेट को आधा खाली छोड़ दें। शाम 7 बजे से पहले अपना डिनर ज़रूर करें।

कोरोना वायरस के घरेलू उपचार में मसाले का है अहम् योगदान

हम सभी जानते हैं कि भारतीय मसालों में हर रोग को ठीक करने की शक्ति है। इस प्रकार, अपने भोजन में दालचीनी, काली मिर्च, इलायची, स्टार ऐनीज़ और लौंग जैसे मसाले शामिल करें। सूखे हल्दी और सूखे अदरक को भी शामिल करें।

कोरोना वायरस के लिए लें अच्छी नींद

हर रात 8 घंटे की नींद लें। जब हम सोते हैं तो हमारी प्रतिरक्षा बनी रहती है और आराम करती है। कोशिश करें कि दिन में न सोएं।

कोरोना वायरस में करें अत्यधित फलों का सेवन

खट्टे और विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करें।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए खाएं हरी सब्जियां

अच्छी तरह से पकाई हुई सब्जियां खाएं, कच्ची सब्जियां या सलाद न लें। कड़वी सब्जियां जैसे करेला, ऐश लौकी आदि का सेवन सुनिश्चित करें। बैंगन, टमाटर, आलू और बेल मिर्च का सेवन कम करें।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए आराम करें

लोगों से बात करें, किताब पढ़ें, सुखदायक संगीत सुनें और कुछ ऐसा करें जो आपको आराम और स्वस्थ महसूस करने में मदद करे। अपनी दिनचर्या में ध्यान को शामिल करें।

धूम्रपान और शराब से बचें और कोरोना वायरस से छुटकारा पाएं

जितना हो सके उतना धूम्रपान और शराब से बचें।

कोरोना वायरस के इलाज में व्यायाम है सहायक

यदि आप थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि न करें। सिर्फ 30 मिनट के प्राणायाम का अभ्यास करें।

कोरोना वायरस के उपचार के लिए जड़ी बूटी का करें उपयोग

  • डॉ रेखा अत्यधिक गुडूची – प्रति दिन 1000 मिलीग्राम टैबलेट लेने की सलाह देती हैं।
  • यदि आपको खांसी है, तो काली मिर्च पाउडर के साथ शहद का एक बड़ा चमचा दिन में तीन से चार बार लें।
  • अगर आपको गले में जलन होती है, तो दिन में कई बार व्योषादि वटाकम चबाएं।
  • गले में दर्द और जमाव के लिए, गर्म पानी से गरारे करें और उसमें गुलाबी नमक और हल्दी पाउडर मिलाएं।

कोरोना वायरस में सहायक होगा हर्बल काढ़ा

यदि आपके पास कंजेशन है, तो इस हर्बल काढ़े को दिन में दो बार खाने से पहले पियें:
दो गिलास पानी उबालें और दो बड़े चम्मच त्रिकटु चूर्ण (सूखे अदरक पाउडर, काली मिर्च पाउडर और लंबी काली मिर्च पाउडर का मिश्रण 1: 1: 1) के अनुपात में डालें। मिश्रण को आधा होने तक उबालें। इसमें तुलसी के पत्ते और ताड़ का गुड़ मिलाएं।

कोरोना वायरस के लिए डाइट प्लान | Diet plan for corona virus in Hindi

उपायुक्त अमित खत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए डाइट चार्ट तैयार किया है। इसके मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों के खान-पान संबंधी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें बताया गया है कि कोरोना संक्रमित मरीज क्या खाएं और क्या न खाएं।

कोरोना वायरस के इलाज के लिए ये चीजें खाएं

कोरोना संक्रमित मरीज ब्राउन राइस, गेहूं का आटा, दलिया व बाजरा का अधिक से अधिक सेवन करें। खाने में प्रोटीन के स्त्रोत जैसे बीन्स या दाल, ताजे फल और सब्जियों को अपने भोजन में शामिल करें। सब्जियों में लाल शिमला मिर्च, गाजर, चुकंदर और हरा साग विशेष है।

कोरोना संक्रमित व्यक्ति को दिन में आठ से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाने और संक्रमण को कम करने के लिए मरीज अधिक से अधिक खट्टे फलों का सेवन करें। व्यक्ति अपने भोजन में अदरक, लहसुन और हल्दी जैसे मसाले आदि शामिल करें। यह प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर हैं। फलों और सब्जियों को अच्छे से धोएं। अपने खाने में प्रोटीन और कैल्शियम के स्त्रोत जैसे लो फैट मिल्क और दही आदि शामिल करें।

उपायुक्त ने बताया कि यदि कोरोना संक्रमित मरीज मांसाहारी है वह तो वह बिना चर्बी वाले प्रोटीन स्त्रोत जैसे स्किनलेस चिकन, मछली और एग व्हाइट को खाने में शामिल करें।

कोरोना वायरस के उपचार के लिए इनसे करें परहेज

मैदा, तला हुआ खाना या जंक फूड जैसे चिप्स, बेकरी आइटम से परहेज करना चाहिए। पैक्ड जूस और कोल्ड ड्रिक नहीं पीना चाहिए। अनसेचुरेटेड फैट्स जैसे नारियल, मक्खन और पाम ऑयल नहीं खाना चाहिए। इसी प्रकार, मांसाहारी व्यक्ति को मटन, लिवर, फ्राइड और प्रोसेस्ड मीट खाने से परहेज करना चाहिए। एक सप्ताह में नॉन वेज दो-तीन बार से ज्यादा नहीं खाना चाहिए और अंडे का पीला भाग हफ्ते में केवल एक बार ही खाना चाहिए।

हमें उम्मीद है, कि कोरोना वायरस के घरेलू उपचार एवं मेडिकल उपचार पर आधारित ये लेख आपको पसंद होगा यदि आप ऐसे ही अन्य लेखों को भी पढ़ना चाहते हैं तो हमारे साथ बने रहें। ये कोरोना वायरस के घरेलू उपचार कोरोना के संक्रमण को कम करने में सहायक हैं न कि कोरोना को पूरी तरह से खत्म करने में, यदि आप कोरोना वायरस से ग्रषित हैं और पूर्ण उपचार खोज रहे हैं तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से सलाह लें।


यदि आप भी हैं अनिद्रा से परेशान तो यहाँ नींद लाने के विभिन्न उपाय जानें!



स्वस्थ रहने के लिए हमें रात में अच्छी नींद की जरूरत होती है। लेकिन कुछ लोग नींद ना आने की समस्या से बेहद परेशान रहते हैं। दरअसल नींद न आने का कारण निम्न में से कोई एक हो सकता है, जैसे तनाव ग्रसित रहना, अधिक सोचना, रात में टीवी और फोन का प्रयोग करना, अधिक मात्रा में जंक फूड का सेवन आदि। तो चलिये आगे बढ़ते हैं और यहाँ जल्दी से नींद लाने के उपाय जानते हैं और साथ ही यह भी जानते हैं, कि कैसे नींद को जल्दी से लाया जा सकता है।
जैसा की हम सभी जानते हैं कम नींद के चलते लोग बीमारियों का शिकार होना शुरू हो जाते हैं। हम इस समस्या को दूर करने के लिए कई प्रकार की दवाइयों और नींद लाने के घरेलु नुस्खे (Home remedies for sleep) का प्रयोग करने लगते हैं। क्या आप जानते हैं कि इन दवाइयों से हमारे शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। आज हम आपकी इस समस्या के बारे में कुछ ऐसी चीजें बताएंगे जिनका प्रयोग करने से आप अच्छी नींद ले सकते हैं। तो चलिए नीचे दिए गए लेख को पढ़कर अच्छी नींद लाने के उपाय और टिप्स के बारे में जानते हैं।

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नींद लाने के उपाय और टिप्स (Nind Lane Ke Upay or Tips)

1. जल्दी से नींद कैसे आएगी – अच्छी नींद के लिए करें मेडिटेशन

अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती है तो आप मेडिटेशन कर अच्छी नींद पा सकते हैं. मेडिटेशन नींद लाने का एक बेहतर उपाय हो सकता है. वह इसलिए कि अगर आप रोजाना मेडिटेशन करते हैं तो आपका स्ट्रेस और एंग्जाइटी कम हो सकती है और रात में ठीक से नींद न लेने की समस्या से राहत पा सकते हैं. रोजाना ध्यान करने और एक्टिविटी करने से आपको अच्छी नींद आ सकती है. यह भी पढ़ें – वजन घटाने के घरेलू उपाय

2. नींद कैसे लाएँ – कैफीन से रखें दूरी

माना जाता है कि कैफीन का सेवन करने से आपकी नींद उड़ सकती है. अगर आपको रात को चाय या कॉफी लेने की आदत है तो इस आदत को आज ही छोड़ दें. रात को कैफीन का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. कैफीन का सेवन सिर्फ रात को ही नहीं बल्कि दिन में भी ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए. कैफीन का ज्यादा सेवन नर्वस सिस्टम के लिए खतरनाक हो सकता है.

3. रात में जल्दी से नींद कैसे लाएँ – सोने का बनाएं शेड्यूल

अगर आपके सोने का कोई शेड्यूल नहीं है तो भी आपको रात की में सोने और नींद न आने की समस्या हो सकती है. रात को समय पर नींद ना आने का एक मुख्य कारण व्यक्ति का कोई स्लीप शेड्यूल ना होना भी हो सकता है. अपने सोने का एक शेड्यूल बनाएं इससे भी आपको अच्छी नींद आने में मदद मिल सकती है.

4. अच्छे से नींद आए उसके लिए क्या करें – स्लीप हैबिट्स में करें सुधार

अगर आप अच्छी नींद चाहते हैं तो आप अपनी गुड स्लीप हैबिट्स को बढ़ाना होगा. अगर आप सच में नेचुरल तरीके से बेहतर नींद पाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपनी स्लीप हैबिट्स को सुधारना होगा. ज्यादातर लोग बिस्तर में जाने के बाद फोन या टीवी देखते हैं. अगर आप अच्छी नींद चाहते है तो  बिस्तर पर जाने के बाद फोन और टीवी से दूर रहें.


नींद लाने के उपाय और टिप्स

  • हर दिन सुबह जल्दी उठने की आदत डालें. जब आप सुबह जल्दी उठेंगे तो रात को खुद ब खुद समय पर नींद आएगी.
  • कमरे के तापमान पर भी फोकस करें. अगर ठंड के दिनों में कमरा बहुत अधिक ठंडा और गर्मी के दिनों में गर्म होगा तो इससे आपको सोने में परेशानी हो सकती है.
  • इन सभी उपायों के अलावा अन्य कुछ ऐसे उपाय भी हैं, जिसकी मदद से रात में अच्छी नींद ली जा सकती है.
  • रात को बेड पर जाने से पहले वार्म बाथ कर लें. रात को सोते समय हल्दी वाले दूध का सेवन करने से भी नींद की समस्या से निजात पाया जा सकता है
  • रात को बिस्तर मे जाकर अपने मन मे ईश्वर का ध्यान करने से भी नींद अच्छी आती है

अच्छी नींद लाने के उपाय और टिप्स 

  • केला

आप निरंतर रूप से केले का सेवन कर सकते हैं क्योकि केले में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो मांस-पेशि‍यों को स्ट्रेस फ्री करते हैं! इसमें मौजूद Magnesium and potassium अच्छी नींद लाने में आपकी मदद करते हैं।

  • हर्बल चाय

अच्छी नींद के लिए आप सोने से पहले हर्बल चाय (Herbal tea) का उपयोग कर सकते हैं, क्योकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व बॉडी में लिक्विड्स की कमी को पूरा करते हैं।

हमें उम्मीद है, कि रात में अच्छी नींद लाने के उपाय के बारे में यह लेख आपको पसंद आया होगा यदि आप ऐसे ही अन्य लेखों को भी पढ़ना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में अपना लेख बताएं हमारी टीम जल्द ही आपके प्रश्न से संबंधित लेख तैयार करने की कोशिश करेगी।


हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान — Pros and Cons of Masturbation in Hindi

हस्तमैथुन एक ऐसा विषय है जिसके बारे में कोई खुल के बात नहीं करता है और यही कारण हमारे दिमाग में शंका का बीज बो देती है। यौन सुख को प्राप्त करने के लिए जब आप अपने गुप्तांगों को उत्तेजित करते हैं तो इसे हस्तमैथुन कहा जाता है। हस्तमैथुन करना यौन सुख को प्राप्त करने और अपनी कामोत्तेजना को शांत करने का सबसे कारगर और स्वस्थ विकल्प है। अगर आप हस्तमैथुन करते हैं तो आपके मन में एक प्रश्न जरूर उत्पन्न होता होगा कि हस्तमैथुन से हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है या नहीं? इसी विषय पर प्रकाश डालते हुए आज हम हस्तमैथुन से जुड़ी उन सभी चीजों के बारे में बताएंगे जिसके बारे में आपको जानना चाहिए ताकि आपके मन में हस्तमैथुन को लेकर जो शंकाएं हैं वो दूर हो जाएं। तो चलिये आगे बढ़िए और हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान (Pros and Cons of Masturbation in Hindi) पढ़िये। इन्हें भी पढ़ें – काजू के फायदे और नुकसान!

हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान – आज के युवा

इस लेख में हम हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान के बारे के बारे में पढ़ेंगे। आज के युवाओं में सेक्स के प्रति इतनी जिज्ञासा उत्पन्न हो गई है कि वे सेक्स का सुख प्राप्त करने के लिए हस्तमैथुन का सहारा लेने लगे हैं। हस्तमैथुन जहां कामोत्तेजना को शांत करने का कार्य करता है वहीं इसके शारीरिक लाभ और हानि भी देखने को मिलते हैं। अगर आप हस्तमैथुन करते हैं तो आपको पता ही होगा कि हस्तमैथुन के दौरान हमारे शरीर में क्या परिवर्तन देखने को मिलते हैं और इसका एहसास कैसा होता है। जाहिर सी बात है कि हस्तमैथुन करने का एहसास इतना आनंददायक होता है कि हम यौन सुख के चरम सीमा हो प्राप्त करने के लिए अपने गुप्तांगों को बड़ी तेजी से उत्तेजित करते हैं और जब स्खलन होता है तब हमारे शरीर को सेक्स तृप्ति का अनुभव होता है। इन्हें भी पढ़ें – वजन घटाने के घरेलू उपाय!

अगर हम हस्तमैथुन का सबसे पहला परिणाम जानने की कोशिश करें तो यह होगा कि “हस्तमैथुन के दौरान हमारे शरीर से एक लिक्विड इजेक्ट (Eject) होता है जिसे वीर्य कहते है। जैसे यह हमारे शरीर से निकलता है तो इसकी पूर्ति करनी भी जरूरी है”। इसकी पूर्ति तो हमारा शरीर कर लेता है। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखते हुए एक स्वस्थ हस्तमैथुन आपके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है। बस आपको हस्तमैथुन से जुड़े लाभ और हानि के बारे में पता होना चाहिए ताकि आप बिना किसी शंका के हस्तमैथुन का आनंद उठा सकें। तो आइये सबसे पहले जानते हैं हस्तमैथुन करने से हमारे शरीर को क्या-क्या फायदे होते हैं?

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हस्तमैथुन करने के फायदे — Benefits of Masturbation in Hindi

हस्तमैथुन एक प्राकृतिक शारीरिक क्रिया है जिसके बहुत से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ हैं। जैसे:-

  • यौन उत्तेजना शांत करना
  • सेक्स संबंध को मजबूत बनाता है
  • सेक्स के दौरान शीघ्र स्खलन से राहत
  • मानसिक तनाव कम करता है
  • अच्छी नींद आती है
  • एकाग्रता बढ़ती है
  • शारीरिक पीड़ा कम करता है
  • सेक्स में सुधार होता है

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जब हमारे गुप्तांग उत्तेजित और यौन के चरम सुख को प्राप्त करने के लिए हम तैयार होते हैं तो उसे शांत करने के दो ही तरीके हैं या तो आप सेक्स करो या फिर हस्तमैथुन। यौन सुख प्राप्त करने के लिए हम अपने शरीर के गुप्तांगों को सक्रिय कर उसके साथ खेलते है ताकि हमें वो एहसास प्राप्त हो सके जिसके लिए हम लालायित होते हैं। अपने गुप्तांगों के साथ खेलने का आनंद ही हमे हस्तमैथुन करने के लिए प्रेरित करता है। हस्तमैथुन का एहसास जितना आनंददायक है उतना ही इसके लाभ भी हैं। आइये एक एक करके इसके लाभ पर प्रकाश डालते हैं।

  1. यौन उत्तेजना शांत करना

अगर आप अपने किसी साथी के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं तो उसके एहसास को हस्तमैथुन के एहसास के साथ तुलना करना संभव नहीं है। लेकिन, हाँ! आप अपनी यौन उत्तेजना को शांत करने के लिए हस्तमैथुन का सहारा ले सकते हैं। यौन उत्तेजना को शांत करने का सबसे सफल और स्वस्थ उपाय हस्तमैथुन है।

  1. आप सेक्स संबंध को मजबूत बना सकते हैं

सेक्स के दौरान कई जोड़ें एक दूसरे का हस्तमैथुन करते हैं जिसकी वजह से उनके बीच लगातार यौन सुख का माहौल बना रहता है। अगर आपका साथी आपके चरम सुख हासिल करने के पहले ही स्खलित हो जाता है तो हस्तमैथुन के जरिये आप अपने चरम सुख का आनंद ले सकते हैं।

  1. सेक्स के दौरान शीघ्र स्खलन से राहत

शारीरिक संबंध बनाने से पहले अगर आप हस्तमैथुन करते हैं तो सेक्स के दौरान आप अपने साथी के साथ लंबे समय तक लुफ़्त उठा सकते हैं। अगर आप अपने साथी के साथ लंबे समय तक सेक्स का आनंद उठाना चाहते हो तो सेक्स से पहले हस्तमैथुन करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है।

  1. मानसिक तनाव कम करता है

हस्तमैथुन के दौरान आपका मस्तिष्क एक ही दिशा में सोचता है और इसी वजह से आप रिलैक्स अनुभव करते हैं। जब भी हम किसी भी रूप में सेक्स के बारे में सोचते हैं तो हमारा मस्तिष्क डोपामाइन (Dopamine) नामक रसायन छोड़ता है जो हमें खुशी का अनुभव दिलाता है। यानि जब जब आप सेक्स के बारे में सोचते हैं, आपका मन इसके प्रति सक्रिय हो जाता है और आपको एक अलग खुशी मिलती है। ठीक ऐसे ही जब आप सेक्स या हस्तमैथुन करते हैं तो मस्तिष्क एंडोर्फिन (Endorphins) नामक रसायन छोड़ता है जो हमें तनाव मुक्त करने में कारगर होता है।

अगर आप तनाव में है तो हस्तमैथुन आपके तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है। लेकिन हाँ, अगर आप हमेशा तनाव में रहते हैं तो अपने तनाव को कम करने के लिए हमेशा हस्तमैथुन का सहारा लेना सही नहीं है। ऐसा करने से आपको इसकी लत लग सकती है और ये आपके शरीर में दूसरी एब्नार्मलिटी को जन्म दे सकता है।

  1. अच्छी नींद आती है

जहां एंडोर्फिन रसायन आपको मानसिक तनाव से निजात दिलाता है वहीं ये ब्लड प्रेशर को कम करके आपके शरीर को शिथिलता प्रदान करता है। जिसकी वजह से अच्छी नींद आती है। आप हस्तमैथुन के बाद अच्छी नींद का अनुभव जरूर करते होंगे।

  1. एकाग्रता बढ़ती है

हस्तमैथुन से तनाव तो कम होता ही है साथ ही मन को शांति का अनुभव भी होता है जो मस्तिष्क को एकाग्र करने के लिए लाभकारी है।

  1. शारीरिक पीड़ा कम करता है

शारीरिक पीड़ा से राहत दिलाने में हस्तमैथुन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हस्तमैथुन के दौरान हमारा मस्तिष्क सिर्फ कामुकता के सागर में घूमता रहता है और इसी वजह से हमें शारीरिक पीड़ा का अनुभव नहीं होता है।

  1. सेक्स में सुधार

जो व्यक्ति हस्तमैथुन करता है उसके गुप्तांग की संवेदना धीरे धीरे कम होती जाती है जिसकी वजह से चरम सुख पाने के लिए उसे काफी देर तक हस्तमैथुन करना पड़ता है। अगर वही व्यक्ति अपने साथी के साथ शारीरिक संबंध बनाए तो काफी देर तक काम-क्रिया में व्यस्त रह सकता है।
आपने यह तो जान लिया कि हस्तमैथुन के क्या क्या फायदे हो सकते हैं। चलिए, अब इसके नुकसान के बारे में जानते हैं।

हस्तमैथुन के नुकसान — Side effects of Masturbation in Hindi

वैसे तो कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है जो इस बात का समर्थन करे कि हस्तमैथुन करने से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन हां, अगर आपको हस्तमैथुन करने की लत लग गई है और आप रोज़ाना हस्तमैथुन करके अपनी कामुक इच्छाओं को शांत करते हैं तो आपको ये ज़रूर जान लेना चाहिये कि इससे आपके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जहां हस्तमैथुन आपके शरीर के लिए लाभकारी है वहीं अगर हस्तमैथुन नियमित रूप से किया जाए तो यह आपके शरीर का दुश्मन भी बन सकता है। हस्तमैथुन के निम्नलिखित नुकसान हैं।

  • यौन संवेदनशीलता में कमी होना
  • लिंग या योनि में सूजन
  • लिंग का टेढ़ा होना
  • खुद के प्रति ग्लानि होना
  • शरीर कमजोर होना
  • दैनिक जीवन में खलल पड़ना
  • हस्तमैथुन की लत लगना
  • शुक्राणु की संख्या पर असर पड़ना
  • पाचन संबंधित शिकायत होना

हर चीज की एक सीमा होती है। अगर आप सीमा पार कर आगे जाते हैं तो वह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। हस्तमैथुन भी इसी का एक अच्छा उदाहरण है, अगर आप निर्धारित रूप से या कभी कभी हस्तमैथुन करते हैं तो इसकी वजह से आपके शरीर को कोई हानि नहीं पहुँचती है। लेकिन अगर यही अनियमित रूप से किया जाए तो इसका परिणाम आपके शरीर को भुगतना पड़ सकता है।

  1. यौन संवेदनशीलता में कमी होना

हस्तमैथुन के दौरान पुरुष अपने लिंग को पकड़ कर आगे पीछे करते हैं जिससे उनके लिंग पर बार बार घर्षण (Friction)होता है और उनकी संवेदनशीलता धीरे धीरे कम होने लगती है। ठीक इसी तरह जब महिलाएं हस्तमैथुन करती हैं तो वे अपनी उंगलियों से अपनी योनि के ऊपरी और अंदरूनी हिस्से को जोर जोर से मसलती हैं और अपनी योनि में उंगलियों डाल कर आगे पीछे करती है जिसके कारण उनकी योनि की अंदरूनी संवेदनशील मसल्स अपनी संवेदना धीरे धीरे खोने लगती है।

ज्यादा हस्तमैथुन आपके गुप्तांगों की संवेदना को कम करता है और यौन सुख प्राप्त करने की चरम सीमा समय को बढ़ाता है। जिसकी योनि संवेदनशील नहीं है उसे सेक्स के दौरान चरम सुख का अनुभव प्राप्त करने के लिए काफी समय लगता है।

  1. लिंग या योनि में सूजन होना

अत्यधिक हस्तमैथुन आपके लिंग/योनि में सूजन ला सकता है। हस्तमैथुन के दौरान हमारे गुप्तांगों में रक्त का दवाब अधिक होने के कारण वो सख्त़ हो जाते हैं और जब स्खलन के चरम सुख को पाने के लिए जोर जोर से अपने गुप्तांगों को मसलते हैं तो उसमे सूजन आ जाती है।

  1. लिंग का टेढ़ा होना

अगर आप हद से ज्यादा हस्तमैथुन करते हैं और वो भी अपने एक ही हाथ से तो आपका लिंग एक तरफ से टेढ़ा हो जाता है। क्योंकि आप हस्तमैथुन के दौरान अपने लिंग को एक दिशा प्रदान करते हैं जिसकी वजह से वो एक तरफ से मुड़ जाता है। आपका लिंग टेढ़ा न हो इसके लिए आपको हस्तमैथुन के दौरान बारी बारी से अपने दोनों हाथों का प्रयोग करना चाहिए।

  1. खुद के प्रति ग्लानि होना

कामोत्तेजना के चरम सुख को प्राप्त करने के लिए हमारा मन हमें हस्तमैथुन करने के लिए प्रेरित करता है। हस्तमैथुन जहां आपके शरीर को कामुक सुख प्रदान करता है वहीं अनियमित हस्तमैथुन के बाद थोड़ी ग्लानि भी महसूस होती है। अगर आप हमेशा हस्तमैथुन करते हैं तो इस प्रकार की मानसिकता स्वाभाविक है। असमय हस्तमैथुन करने से मानसिक रूप से हमें बुरा महसूस होता है।

  1. शरीर कमजोर होना

हस्तमैथुन करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर आप असमय हस्तमैथुन करते हैं और आपका खान पान सही नहीं है तो आपका शरीर कमजोर हो सकता है। हस्तमैथुन करने के बाद हमारे शरीर से जो वीर्य बाहर निकलता है उसकी पूर्ति शरीर खुद करता है। लेकिन अगर आपका खान पान सही नहीं है तो वीर्य की पूर्ति कैसे होगी? वीर्य की पूर्ति के लिए आपका आहार सही होना चाहिए नहीं तो शरीर को कमजोर होते देर नहीं लगती।

  1. दैनिक जीवन में खलल डालता है

हर समय कामोत्तेजना के सागर में गोते लगाना आपको हस्तमैथुन करने के लिए प्रेरित करता है। अगर आप हर समय सेक्स, ब्लू फिल्में और एडल्ट मैगजीन पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो इसकी वजह से पूरे दिन आपके मन में सेक्स और हस्तमैथुन का ख्याल ही रहता है जो आपके दूसरे काम पर बाधा डालता है।

  1. हस्तमैथुन की लत

सेक्स की इच्छा की पूर्ति करने के लिए जरूरी नहीं कि आपको एक साथी की जरूरत पड़े। आप हस्तमैथुन के जरिये भी अपनी शारीरिक भूख को शांत कर सकते हैं। लेकिन सेक्स से संबंधित सभी पहलुओं को अपने निजी जीवन में शामिल कर लेना सही नहीं है। जहां हस्तमैथुन आपके गुप्तांगों को सुख देने का काम करता है वहीं यह सुख आपके लिए एक लत बन सकता है। हस्तमैथुन की लत का यही मतलब है कि आप सेक्स के अलावा कुछ सोचते ही नहीं और आपका मन बस सेक्स पर ही केन्द्रित रहता है जिसकी वजह से आप अपने किसी भी कार्य को एकाग्र मन से नहीं कर पाते हैं।

  1. शुक्राणु की संख्या पर असर

हस्तमैथुन के सुख को प्राप्त करने के लिए हम अपने वीर्य को स्खलित करते हैं जिसकी पूर्ति शरीर कर लेता है। बार बार हस्तमैथुन करने से शरीर उसकी पूर्ति करता है लेकिन धीरे धीरे वीर्य की पूर्ति करने की काबिलीयत नष्ट हो जाती है। जिसकी वजह वीर्य में मौजूद शुक्राणुओं की संख्या पर इसका बुरा असर पड़ता है।

  1. पाचन संबंधित शिकायत

भोजन के तुरंत बाद हस्तमैथुन आपके पाचन क्रिया में बाधा डाल सकता है। अगर आपने अभी अभी खूब सारा भोजन किया है और भोजन करने के तुरंत बाद हस्तमैथुन करने लग गए तो आपका शरीर भोजन को पचाने के बजाय आपके यौन सुख को पूरा करने में लग जाता है। जिसकी वजह से आपकी पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इसलिए भोजन के तुरंत बाद हस्तमैथुन करना सही नहीं है।

हस्तमैथुन कितनी मात्रा में करें 

इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी हेल्थ कैसी है। कई लोग हर रोज हस्तमैथुन करते हैं और कई लोग हफ्ते में एक बार ही करते हैं। इसलिए आप अपने समय और स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए ही हस्तमैथुन करें। देखा जाए तो हफ्ते में एक या दो बार हस्तमैथुन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और शरीर इसका इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।

उम्मीद करते हैं की हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान ब्लॉग को पढ़ने के बाद आप हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान (Pros and Cons of Masturbation Hindi Me) से जुड़ी सभी जरुरी बातें जान गए होंगे।

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